भारत का इकलौता शहर, जहां पुलिस की वर्दी खाकी नहीं सफेद है; नाम सुनकर यकीन नहीं होगा
Interesting Facts : सोशल मीडिया पर आपने भारत के कई शहरों से जुड़े अनोखे और मजेदार फैक्ट पढ़े होंगे। मगर आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताएंगे जहां पर पुलिस खाकी नहीं बल्कि, सफेद वर्दी में दिखाई देती है।

Interesting Facts : भारत के प्रत्येक प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर यानी कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए वहां की पुलिस कार्यरत और तत्पर रहती है। प्रदेश के छोटे से छोटे से कस्बे में भी जब कहीं कोई घटना होती है तो सबसे पहले पुलिस को सूचित किया जाता है। आमतौर पर जब पुलिस अपनी फोर्स के पहुंचती है तो उनके साथ कांस्टेबल और कुछ सामग्री भी रहती है। ऐसे दृश्य शहरों में बेहद आम होते हैं। पुलिस फोर्स को देखकर उनकी वर्दी पर भी आपने कभी न कभी तो गौर ही किया होगा। बता दें कि, भारत के लगभग शहरों में पुलिस की वर्दी का रंग खाकी देखने को मिलता है मगर, क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा शहर भी है जिसकी पुलिस की वर्दी का रंग सफेद होता है ? आज हम आपको उसी शहर का नाम बताएंगे और ये भी बताएंगे कि आखिर उस शहर की पुलिस सफेद वर्दी क्यों पहनती है ?
पुलिस की वर्दी का रंग खाकी ही क्यों
गौरतलब है कि, भारत में पुलिस की वर्दी का खाकी रंग होने के पीछे कई सारे कारण हैं। सबसे पहले हम आपको इसके ऐतिहासिक कारण के बारे में बताते हैं। दरअसल, जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था तो उस वक्त पुलिस सफेद वर्दी ही पहनती थी मगर वर्दी जल्दी गंदी होने के कारण चाय की पत्ती के पानी या कॉटन फैब्रिक से उन कपड़ों का धोया जाने लगा जो कि पुलिसकर्मियों को देखने में काफी अलग और अच्छा लगा। इनके अलावा भी कुछ वजहें हैं:
- खाकी रंग पुलिसकर्मियों को वन, जंगल या पेड़-पौधों से आच्छादित इलाकों में छिपने में मदद करता है।
- माना जाता है कि, खाकी रंग पुलिसकर्मियों को अनुशासित और सख्त छवि देने में मदद करता है।
- हैरी लैंडसन ने 1847 में इस रंग को पुलिस की वर्दी के तौर पर अंगीकृत किया जिसके बाद ये चलन में आ गया।
पुलिस की वर्दी पर रस्सी क्यों लगी होती है
आपने गौर किया होगा कि, पुलिस की वर्दी पर कंधे की जगह एक रस्सी लगी होती है। क्या आपको पता है कि, पुलिस की वर्दी पर रस्सी क्यों लगी होती है और इसका क्या काम होता है ? इस वर्दी पर लगी रस्सी को 'लैनयार्ड' कहा जाता है। ये रस्सी वर्दी पर कंधे से सीने की जेब की ओर होती है और जेब में रस्सी से सीटी बंधी हुई होती है। यह लैनयार्ड आपको भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के अलावा सिक्योरिटी पर्सनल की वर्दी में लगी हुई दिख सकती है। गौरतलब है कि, डीएसपी या एसएसपी या इस रैंक से ऊपर के अधिकारियों की वर्दी पर लैनयार्ड काले रंग की होती है। इतना ही नहीं अलग-अलग राज्यों में ये रंग अलहदा हो सकता है और सेना के जवानों की वर्दी पर लैनयार्ड का रंग उनकी रेजिमेंट पर निर्भर करता है।
यहां सफेद वर्दी पहनते हैं पुलिस वाले
सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि, कोलकाता पुलिस की वर्दी का रंग सफेद होता है। ये रंग के वहां की गर्म और नमीयुक्त जलवायु के कारण तय किया गया है। वर्दी का सफेद रंग राज्य पुलिस को अलग पहचान देता है।
कोलकाता पुलिस की वर्दी का इतिहास
यदि आपको नहीं पता है तो बताते चलें कि, कोलकाता में जब ब्रिटिश शासन था तब 1845 में अंग्रेजों ने यहां पुलिस व्यवस्था का गठन किया था। पुलिस की वर्दी को लेकर चली मंत्रणा के बाद कोलकाता पुलिस की वर्दी का रंग सफेद तय हुआ। 1857 में हैरी लैंडसन ने कोलकाता पुलिस की वर्दी के रंग को खाकी करने का प्रस्ताव दिया मगर कोलकाता ने इसे ठुकरा दिया। वजह बताई गई कि, तटीय इलाका होने के कारण कोलकाता में वातावरण काफी नम है।
मौसम के कारणों के मद्देनजर सफेद रंग को उपयुक्त माना गया और यही कोलकाता पुलिस की पहचान बन गई। बता दें कि, इन सबके बाद फिर 1861 में बंगाल पुलिस का भी गठन हुआ।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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