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5 स्टार होटलों में टॉयलेट सीट में बर्फ क्यों डाली जाती है, सुनकर दिमाग घूम जाएगा; दिलचस्प है वजह

Interesting Facts : सोशल मीडिया पर आपने होटलों से जुड़े कई अनोखे और मजेदार फैक्ट पढ़े होंगे। इसी क्रम में आज हम आपको बताएंगे कि, 5 स्टार होटलों में टॉयलेट सीट में बर्फ क्यों डाली जाती है ?

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Image Source : AI PHOTO यूरिनल में पड़े बर्फ के टुकड़े।

Interesting Facts : 5 स्टार होटलों में आपने उनके मेंटेनेंस के अलग-अलग तरीकों को तो देखा ही होगा। हर फाइव स्टार होटल अपने ग्राहकों को इंप्रेस करने के लिए साफ-सफाई, हाइजीन और प्रबंधन का विशेष ध्यान रखते हैं। आमतौर पर विजिटर किसी भी जगह की साफ-सफाई का अंदाजा वहां उपलब्ध वॉशरूम या टॉयलेट को देखकर ही लगा लेते हैं। यही वजह है कि टॉयलेट्स की साफ-सफाई पर होटल का प्रबंधन खास ध्यान देता है। मगर, कई फाइव स्टार होटलों के पुरुष टॉयलेट्स में एक अनोखी चीज देखने को मिलती है। ये अनोखी चीज है उनके यूरिनल्स में पड़े बर्फ के टुकड़े। क्या आपको पता है कि, 5 स्टार होटलों में टॉयलेट सीट में बर्फ क्यों डाली जाती है ?

इंस्टाग्राम पर रील के कमेंट में मिले जवाब 

इंस्टाग्राम पर ghummakadpandit नामक हैंडल से एक रील शेयर की गई है। इसमें पूछा गया है कि 5 स्टार होटलों में टॉयलेट सीट में बर्फ क्यों डाली जाती है ? रील के कमेंट में यूजर्स ने अलग-अलग वजहें बताईं। एक यूजर ने लिखा कि, 'इसका इस्तेमाल दुर्गंध कम करने के लिए किया जाता है। बर्फ बैक्टीरिया की वृद्धि को धीमा करती है और पेशाब की गंध को नियंत्रित करने में मदद करती है, जिससे बाथरूम अधिक समय तक स्वच्छ और स्वच्छ रहता है।' दूसरे ने लिखा कि, 'दुर्गंध को कम करने के लिए - बर्फ चीजों को ठंडा रखती है, जिससे गंध को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।' तीसरे यूजर ने​ लिखा ​कि, 'बर्फ जमने से बैक्टीरिया नहीं पनपते और मूत्रालय से बदबू नहीं आती। साथ ही, बर्फ पिघलने पर पेशाब पिघले हुए पानी के साथ बाहर निकल जाता है और मूत्रालय अंदर से साफ रहता है।' 

प्रतिदिन 3-4 किलो बर्फ की होती है खपत ?

इंस्टाग्राम पर ही urimatschweiz नामक हैंडल से इसके बारे में और डिटेल शेयर की गई। इसमें लिखा गया कि, 'बर्फ के टुकड़ों का उपयोग दुर्गंध को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे बर्फ पिघलती है, यह मूत्र को बहा ले जाती है, जिससे यूरिनल लंबे समय तक साफ रहता है। ठंडा तापमान भी गंध को कम करने में मदद करता है। लेकिन हालांकि यह प्रभावी लग सकता है, यह ऊर्जा और संसाधनों के मामले में काफी अपव्ययी है। प्रति यूरिनल, प्रति दिन लगभग 3-4 किलोग्राम बर्फ के टुकड़ों की आवश्यकता होती है! यह न केवल बर्फ का एक भारी भार है, बल्कि ऊर्जा की भी भारी खपत करता है। इतनी मात्रा में बर्फ के उत्पादन के लिए 0.3-0.8 किलोवाट-घंटे ऊर्जा की आवश्यकता होती है।' 

यदि आप अब किसी होटल या मॉल के पुरुष टॉयलेट में यूरिनल के अंदर बर्फ देखें तो समझ जाएं कि इन्हें किस उद्देश्य से डाला गया है। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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