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ट्रेन के पहिये पर रबड़ क्यों नहीं लगा होता, वजह सुन​कर दिमाग हिल जाएगा; नहीं जानते हैं तो जान लें

Railway Interesting Facts: सोशल मीडिया पर आपने भारतीय रेलवे से जुड़े अनोखे और अनसुने फैक्ट्स तो सुने ही होंगे। आज हम आपको रेलवे से जुड़े एक और बेहद रोचक फैक्ट के बारे में बताने जा रहे हैं।

why no rubber on train wheels, train wheels interesting facts, why train Wheel has no rubber, train - India TV Hindi Image Source : FREEPIK ट्रेन के पहिये।

Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे लगातार अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को और सुदृढ़ करने की दिशा में तत्परता से कार्यरत है। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के अलावा 4 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और 2 अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात दी। विद्युतीकरण, माल ढुलाई, आधुनिकीकरण और यात्री सुविधा जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य कर भारतीय रेलवे दुनिया भर के रेल नेटवर्कों में एक अलग स्थान बना लिया है। मगर भारतीय रेलवे की ट्रेनों से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य भी होते हैं जिनके बारे में काफी कम लोगों को ही जानकारी होती है। रेलवे की रोचक जानकारी की इस कड़ी में आज हम आपको बताएंगे कि, ट्रेन के पहिये पर रबड़ क्यों नहीं लगा होता है ? यदि आपको भी इस सवाल का जवाब नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं। 

ट्रेन के पहिये का वजन 

गौरतलब है कि, ट्रेन के पहिये का वजन का वजन 326 किलोग्राम (LHB कोच) से लेकर 554 किलोग्राम (इलेक्ट्रिक इंजन) तक हो सकता है। ये जानकारी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की एक रिपोर्ट में मिलती है। हालांकि, जनरल कोच के पहिये करीब 384 किलो और डीजल इंजन के पहिये 528 किलो के होते हैं। 

Image Source : Freepik भारतीय ट्रेन।

कहां बनते हैं ट्रेन के पहिये 

कभी आपने किसी ट्रेन को गुूजरते देख ये सोचा है ​कि, ट्रेन के पहिये कहां बनते होंगे ? तो आज हम आपको इसके बारे में भी बता देते हैं। दरअसल, ट्रेन के पहिये बेंगलुरु (कर्नाटक) की रेल पहिया फैक्ट्री और बिहार के सारण में बेला स्थित रेल व्हील प्लांट (RWP) में बनते हैं। वहीं, ट्रेन के पहिये बनाने में तमिलनाडु में भी फोर्ज्ड पहियों के लिए नई इकाइयां स्थापित की जा रही हैं, जिससे भारत इन पहियों का निर्यातक बन सके।  

ट्रेन के पहिये के बारे में ये भी जानें 

  • ट्रेन के पहिये पूरी तरह गोल नहीं होते हैं बल्कि ये अंदर से मोटे और बाहर से पतले होते हैं। ट्रेन के मुड़ने पर बाहर वाला पहिया मोटे भाग पर चलता है और अंदर वाला हिस्सा पतले भाग पर चलता है। इसी से ट्रेन स्वत: ट्रैक के सेंटर में आती है। 
  •  अत्यधिक प्रेशर और घिसाव को सहने के लिए  ट्रेप के पहियों को स्टील मिश्रधातुओं से बनाया जाता है। 
  •  ट्रेन के पहियों का आकार काफी खास होता है और इसी वजह से ट्रेन के मुड़ते समय पहिये अलग-अलग दूरी तय करते हैं। 
  •  रिपोर्ट्स में किए गए दावों के मुताबिक, पहियों को इम्पोर्ट करने में ₹70,000 का खर्चा आता है और प्रत्येक कोच में 8 पहिये होते हैं। 

Image Source : Freepik भारतीय ट्रेन।

ट्रेन के पहिये पर रबड़ क्यों नहीं होता 

मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावों के मुताबिक, स्टील के पहिये और पटरी के बीच फ्रिक्शन कम होता है इससे ट्रेन को भारी वजन के साथ कम एनर्जी में तेज गति से चलने में मदद मिलती है। चूंकि, रबड़ के पहियों में फ्रिक्शन यानी घर्षण काफी ज्यादा होता है जो कि अधिक ऊर्जा खपत का द्योतक है। ऐसे में पहियों के जल्दी घिसकर पटरी से उतरने की संभावना भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि, ट्रेन के पहियों पर रबड़ नहीं लगा होता है। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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