रेलवे स्टेशन पर 'समुद्र तल से ऊंचाई' क्यों लिखी होती है, हजार बार सफर करके भी नहीं जानते वजह; आज जान लें
Railways Interesting Facts: सोशल मीडिया पर आपने रेलवे से जुड़े कई अनोखे और रोचक फैक्ट्स के बारे में पढ़ा होगा। आज हम आपको ऐसे ही एक और रोचक तथ्य के बारे में बताएंगे।

Railways Interesting Facts: अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारतीय रेलवे लगातार यात्री हित में अभूतपूर्व कदम उठा रहा है। वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत ट्रेनों का सफल संचालन इसका जीता-जागता उदाहरण है। ट्रेन में यात्रियों का सफर सुहाना हो और उनको हर छोटी सी छोटी सुविधा आराम से मिल सके इसका भी भारतीय रेलवे खास ध्यान रखता है। ये बातें हम नहीं बल्कि देश के वे लाखों-करोड़ों यात्री कहते हैं जो कि भारतीय रेलवे की सुविधाओं से दिन-प्रतिदिन लाभान्वित होते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर कई बार यात्री कुछ शिकायतें भी करते हैं जिनका संज्ञान लेकर भारतीय रेलवे तत्काल उन शिकायतों के निस्तारण के आदेश देता है। ट्रेन से सफर के दौरान कई यात्री रेलवे के उन कामों को देखते हैं जो कि रेलवे स्टेशन या ट्रैक पर किए जा रहे होते हैं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने बताया कि, उसने रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर रंग—रोगन के दौरान किसी को पेंट से 'समुद्र तल से ऊंचाई' लिखते हुए देखा। यूजर ने पूछा कि, आखिर रेलवे स्टेशन के बोर्ड समुद्र तल से ऊंचाई लिखे जाने का क्या मतलब है ? आज हम आपको इसकी वजह के बारे में बताते हैं।
रेलवे स्टेशन के बोर्ड किस मैटीरियल के होते हैं
भारतीय रेलवे स्टेशनों पर पीले रंग के बोर्ड लगाता है जिन पर अमुक स्टेशन का नाम स्पष्ट लिखा होता है। क्या आपको पता है कि, ये बोर्ड किस मैटीरियल के बने होते हैं ? हम बताते हैं, दरअसल जिस बोर्ड पर स्टेशन का नाम लिखा होता है वे बोर्ड आमतौर पर मजबूत लोहे या एल्यूमीनियम शीट द्वारा बनाए जाते हैं। बदलते मौसम में इन बोर्ड पर ज्यादा असर न पड़े इसके लिए इस पर अच्छी क्वालिटी का कलर और रात में चमकने वाली रिफ्लेक्टिव शीट लगाई जाती है। हालांकि, आज भी कुछ स्टेशनों पर पत्थरों से बने बोर्ड लगे हैं जिन पर काले रंग से स्टेशन का नाम लिखा हुआ है।
Image Source : indianrailinfo हावड़ा स्टेशन।
रेलवे स्टेशन के बोर्ड से जुड़े पुराने नियम
रिपोर्ट्स के मुताबिक पता चलता है कि, भारतीय रेलवे ने स्टेशनों के बोर्ड से जुड़े कुछ नियम निर्धारित किए थे, जिनका पालन अनिवार्य था। आइए जानते हैं कि, वे कौन-कौन से नियम थे:
- साइन बोर्ड पर शीट का प्रयोग: रेलवे बोर्ड ने 1999 में एक नियम बनाया था कि, सभी रेलवे स्टेशनों पर मानक साइनबोर्ड यानी पीले रंग के बोर्ड का उपयोग होगा। इसके दौरान हाई-इंटेंसिटी रिफ्लेक्टिव शीट का उपोग सुनिश्चित करने की बात नियम में कही गई थी।
- लाइट की समुचित व्यवस्था: रेलवे नियमों के मुताबिक, सभी रेलवे स्टेशनों पर समुचित प्रकाश की व्यवस्था किए जाने के आदेश दिए गए थे ताकि रात में यात्रियों को और लोको पायलट्स को रेलवे स्टेशन का नाम दिख सके।
- एडवरटाइजिंग: 1999 में एक नियम बनाया गया था कि, रेलवे स्टेशन की दीवारों या बोर्ड्स पर एडवरटाइजिंग करने के लिए लोगों को लिखित अनुमति लेनी होगी ताकि मुख्य बोर्ड पर नाम स्पष्ट बना रहे।
रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर समुद्र तल से ऊंचाई क्यों लिखते हैं
ixigo के एक लेख के मुताबिक, भारत में रेलवे स्टेशनों के निर्माण के दौरान समुद्र के एवरेज लेवल की जानकारी से पटरियों को बिछाने में मदद मिलती थी। इतना ही नहीं समुद्र तल से ऊंचाई की जानकारी से उच्च ज्वार से बचाने में भी मदद मिलती थी। समुद्र तल से ऊंचाई का प्रयोग स्टेशन के पास इमारतों के निर्माण की योजना बनाने के लिए भी किया गया। दावा किया जाता है कि, समुद्र तल से ऊंचाई से ट्रेन के लोको पायलट को ये अंदाजा लगाने में मदद मिलती थी कि वे किस ऊंचाई पर ट्रेन दौड़ा रहे हैं।
स्टेशन के बोर्ड पर समुद्र तल से ऊंचाई लिखने के फायदे
रेलवे स्टेशनों के बोर्ड पर समुद्र तल से ऊंचाई के अन्य फायदों के बारे में भी आपको पता होना चाहिए। दरअसल, जब कोई ट्रेन समुद्र तल से एक निर्धारित ऊंचाई से नीचे आती थी तब लोको पायलट को दो स्टेशनों के बीच सही स्पीड का पता लगाने में मदद मिलती थी। हालांकि, आजकल ट्रेनों में स्पीड की योजना और उसकी मॉनीटरिंग पहले से ही की जाती है। यही वजह है कि, अब जो रेलवे स्टेशन के नए बोर्ड बनाए जाते हैं उन पर समुद्र तल से ऊंचाई नहीं लिखी होती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी रिपोर्ट्स पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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