A
  1. Hindi News
  2. वायरल न्‍यूज
  3. सेंधा नमक को लाहौरी नमक क्यों कहते हैं, बड़ी दिलचस्प है वजह; सुनकर चौंक जाएंगे

सेंधा नमक को लाहौरी नमक क्यों कहते हैं, बड़ी दिलचस्प है वजह; सुनकर चौंक जाएंगे

Amazing Facts : सोशल मीडिया पर आपने कई तरह के खाद्य पदार्थों से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ा होगा। मगर, आज हम आपको बताएंगे कि सेंधा नमक को लाहौरी नमक क्यों कहते हैं ?

सेंधा नमक को लाहौरी...- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK सेंधा नमक को लाहौरी नमक क्यों कहते हैं ?

Amazing Facts : भोजन में सबसे बड़ी भूमिका अगर किसी चीज की है तो वो है नमक, जिसके इस्तेमाल मात्र से किसी भी डिश का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। नमक की भी कई वैरायटी से आप परिचित होंगे जिसमें सफेद नमक, काला नमक, पिंक सॉल्ट इत्यादि नाम शामिल हैं। मगर, क्या आपको पता है कि, नमक में एक कैटेगरी सेंधा नमक की भी होती है जिसे कुछ लोग 'लाहौरी नमक' के नाम से भी जानते हैं। इसका उपयोग खाने के खाने के अलावा सिकाई करने के लिए भी किया जाता है। आपने देखा होगा कि हाथ-पैर की सिकाई करने के लिए लोग इस नमक को गर्म पानी में डालकर ​उससे सिकाई करते हैं। मगर, आखिर सेंधा नमक को लाहौरी नमक क्यों कहते हैं ? यदि आपको इसकी वजह नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में ही बताने वाले हैं। 

भारत में कितना नमक उत्पादन होता है 

Salt Commissioner Organisation of India की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत,चीन और अमेरिका के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नमक उत्पादक देश है।वैश्विक वार्षिक नमक उत्पादन लगभग 307 मिलियन टन है। पिछले 75 वर्षों में नमक उद्योग की वृद्धि और उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। 1947 में स्वतंत्रता मिलने के उपरांत घरेलू आवश्यकता को पूरा करने के लिए यूनाइटेड किंगडम और अदन से नमक आयात किया जाता था लेकिन आज भारत ने न केवल घरेलू आवश्यकता को पूरा करने के लिए नमक उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, बल्कि अतिरिक्त नमक का निर्यात भी कर रहा है। 1947 में नमक का उत्पादन 1.9 मिलियन टन था, जो 2022-23 में बढ़कर रिकॉर्ड 39.11 मिलियन टन हो गया। 

भारत में प्रमुख नमक उत्पादन केंद्र 

गौरतलब है कि, भारत में कई तरह के नमक का उत्पादन होता है। इसमें समुद्री नमक गुजरात के तट (जामनगर, मीठापुर, झखाऊ, चिरई,) पर मिलता है। इसके अलावा ये भावनगर, राजुला, दहेज, गांधीधाम, कांडला, मालिया, लावणपुर, तमिलनाडु (तूतीकोरिन, वेदारण्यम, कोवेलोंग), आंध्र प्रदेश (चिन्नागंजम, इस्कापल्ली, कृष्णापट्टनम, काकीनाडा और नौपाड़ा), महाराष्ट्र (भांडुप, भयंदर, पालघर), उड़ीसा (गंजाम, सुमाडी) और पश्चिम बंगाल (कोंताई) में मिलता है। राजस्थान में अंतर्देशीय नमक का काम झील के नमकीन पानी और उप-मिट्टी के नमकीन पानी का उपयोग करके किया जाता है। सांभर झील, नावा, राजास, कुचामन, सुजानगढ़ और फलोदी कच्छ के रण में नमक का काम उप-मृदा नमकीन पानी का उपयोग करके किया जाता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश राज्य के मंडी में सेंधा नमक का भंडार है।  

Image Source : Freepik नमक का उत्पादन।

सेंधा नमक को लाहौरी नमक क्यों कहते हैं 

इसके पीछे व्यापारिक और भौगोलिक कारण हैं। दरअसल, भारत और पाकिस्तान के विभाजन से पहले सेंधा नमक खेवड़ा खदान से निकालकर लाहौर जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों से होकर उत्तर भारत, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और अन्य इलाकों में पहुंचता था। चूंकि तत्कालीन दौर में लाहौर व्यापारिक गति​विधियों का केंद्र था वहीं ये बिक्री के लिए आता था। आम बोलचाल में व्यापारी इसे 'लाहौर से आया नमक' कहते थे। धीरे-धीरे इस तरह सेंधा नमक लाहौरी नमक नाम से विख्यात हो गया, भले ही अब ये लाहौर से नहीं आता। 

सेंधा नमक का आयुर्वेदिक नाम 

बता दें कि सेंधा नमक आयुर्वेद में सैंधव लवण नाम से उल्लिखित है। इसका अर्थ था- 'सिंधु नदी से निकला नमक।' इस नमक का इतिहास हजारों साल पुराना है। आज यह नमक व्रत में, रोजाना खाने, आयुर्वेदिक उपचार और यहां तक कि बाथ साल्ट के रूप में भी इस्तेमाल होता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

ये भी पढ़ें -
ट्रेन की टंकी में कितने लीटर डीजल आता है, माइलेज सुनकर दिमाग घूम जाएगा; नहीं जानते हैं तो जान लें
 

बाथरूम और वॉशरूम में क्या अंतर होता है, सुनकर कन्फ्यूज हो जाते हैं लोग; क्या आपको पता है