ट्रेन के जनरल डिब्बे में 3 गेट क्यों होते हैं, सफर से पहले जान लें; नहीं तो पछताएंगे
Railway Interesting Facts: सोशल मीडिया पर आपने भारतीय रेलवे और इसके अजब-गजब नियमों के बारे में खूब सुना होगा। मगर आज हम आपको बेहद अनोखा नियम बताने जा रहे हैं जिसकी वजह कई लोगों को नहीं पता होती है।
Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे तीव्र गति से यात्रीहित और देशहित में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। ट्रेनों के अपडेशन से लेकर रेलवे ट्रैक की मरम्मत की बात हो या फिर यात्रियों को त्वरित स्वच्छता सेवा देने बात हो भारतीय रेलवे हर पैमाने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यही वजह है कि, अब इसका नाम दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शुमार हो गया है। ट्रेनों के अपडेशन की बात हो रही है तो क्या आपको ये पता है कि भारतीय रेलवे अपनी ट्रेनों के जनरल डिब्बों में तीन गेट क्यों लगाता है ? यदि आप भी इस सवाल के जवाब को ढूंढ़-ढूंढ़कर थक चुके हैं तो अब हम आपको इसका जवाब देंगे।
जनरल कोच ट्रेन के पहले और आखिर में क्यों होते हैं
सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि, जनरल कोच को ट्रेन के पहले और आखिर में क्यों लगाते हैं ? दरअसल, जनरल कोच में काफी भीड़ होती है। जनरल डिब्बे को बीच में लगाने से यात्री या सामान को उस बोगी से गुजरने में बहुत दिक्कत आएगी। ऐसे में यात्रियों को स्लीपर कोच से होते हुए जनरल डिब्बे को पार करके जाना पड़ सकता है। परिणामस्वरूप ऐसा करना किसी भी यात्री के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है। इसलिए यात्रियों की सुविधा को देखते हुए जनरल डिब्बे को पहले और आखिरी में लगाया गया है।
जनरल कोच में 3 गेट क्यों होते हैं
नियमों के मुताबिक, ट्रेन के जनरल डिब्बे में 3 गेट इसलिए होते हैं ताकि भीड़ में यात्रियों को चढ़ने-उतरने में सहूलियत हो और यदि वेंडर्स को आवाजाही करनी भी हो तो उन्हें भी आसानी हो। इसके अलावा सुरक्षा और आपात स्थिति (जैसे दुर्घटना) में लोगों को बाहर निकलने के लिए ज्यादा विकल्प मिलें इसलिए भी तीन गेट लगे होते हैं। इन डिब्बों में इस बात की पूरी संभावना होती है कि ज्यादा यात्री संख्या के कारण 2 गेट कम पड़ सकते हैं..यही वजह है कि जनरल कोच में तीन गेट दिए होते हैं।
ये भी हैं कारण
- जनरल डिब्बे अनारक्षित होते हैं यानी इनका रिजर्वेशन नहीं होता है। इनमें सीटें तय नहीं होतीं। त्योहारों और छुट्टियों में इनमें बहुत भीड़ होती है।
- तीन गेट होने से यात्री आसानी से अंदर-बाहर निकल सकते हैं।
- रेल मंत्रालय के नियमों के अनुसार किसी भी कोच में कम से कम 3 निकास द्वार होने चाहिए।
- यह सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू है, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में, अगर एक या दो दरवाजे ब्लॉक हो जाएं, तो तीसरा दरवाजा आपातकालीन निकास के रूप में काम कर सके और लोगों की जान बचा सके।
- यह डिज़ाइन यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, खासकर उन डिब्बों के लिए जहां यात्रियों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बहुत बढ़ जाती है।
...तो अब अगर आप भी कभी ट्रेन के जनरल डिब्बे से सफर कर रहे हों और चढ़ने या उतरने में तकलीफ हो तो याद रखिएगा कि जनरल कोच में तीन गेट होते हैं, इससे आपको ज्यादा असुविधा नहीं होगी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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