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Hindi News विदेश अन्य देश तीसरे विश्व युद्ध की बज गई घंटी! क्या नाइजर और अफ्रीकी देशों में होने वाली है रूस-यूक्रेन से भी बड़ी जंग

तीसरे विश्व युद्ध की बज गई घंटी! क्या नाइजर और अफ्रीकी देशों में होने वाली है रूस-यूक्रेन से भी बड़ी जंग

रूस-यूक्रेन के बाद अब नाइजर और अफ्रीकी देशों के बीच भी युद्ध की चिंगारी भड़क उठी है। नाइजर के सेना जनरल ने अपने सैनिकों और देशवासियों को अफ्रीकी देशों के खिलाफ जंग के लिए तैयार रहने को कहा है। इससे तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका बढ़ गई है। अफ्रीकी देशों ने नाइजर सैन्य शासन को अपदस्थ राष्ट्रपति को बहाल करने की चेतावनी दी थी।

युद्ध की प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi Image Source : AP युद्ध की प्रतीकात्मक फोटो

रूस-यूक्रेन युद्ध की आग के बीच अफ्रीकी देश नाइजर में भी भीषण जंग की चिंगारी भड़क उठी है। अब नाइजर और अफ्रीकी देशों में रूस-यूक्रेन से भी बड़े युद्ध होने की आशंका बढ़ गई है। दरअसल नाइजर की सेना ने अपने देश में तख्तापलट कर दिया है और राष्ट्रपति को नजरबंद कर दिया है। इससे खफा अफ्रीकी देशों ने नाइजर की सेना को 1 हफ्ते के भीतर राष्ट्रपति को बहाल करने या फिर युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा था। 1 हप्ते होने को हैं, मगर नाइजर की सेना ने ऐसा नहीं किया। साथ ही अब नाइजर सैन्य शासन और नागरिक समाज समूहों ने मिलकर अफ्रीकी देशों से बड़ी जंग लड़ने को तैयार रहने का ऐलान कर दिया है। इससे तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका बढ़ गई है।

नाइजर में सत्तारूढ़ सेना और नागरिक समाज समूहों ने देशवासियों से विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ और देश की आजादी के लिए लड़ने की खातिर आज बृहस्पतिवार को राजधानी में एकजुट होने का आह्वान किया है। नागरिक समाज समूह ‘एम62’ के अंतरिम समन्वयक ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) से कहा, ‘‘हम सभी विदेशी बलों के तत्काल बाहर निकल जाने की बात कर रहे हैं। हम देश की संप्रभुता की खातिर संघर्ष जारी रखने के लिए सभी प्रकार की धमकियों के खिलाफ लामबंद होंगे। नाइजर के लोगों की गरिमा का बिना किसी अपवाद के सभी सम्मान करेंगे।’’ देश की सेना ने लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को करीब एक सप्ताह पहले अपदस्थ कर दिया था। सेना और नागरिक समाज समूहों ने यह आह्वान तीन अगस्त को किया।

इसी तारीख को 63 वर्ष पहले पाई थी फ्रांस से आजादी

यह वही तारीख है जब 1960 में नाइजर की अपने पूर्व औपनिवेशिक शासक फ्रांस से आजादी की घोषणा की गई थी। नियामी में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की संभावना है। नाइजर में तख्तापलट की पश्चिमी देशों ने कड़ी निंदा की है। कई पश्चिमी देश अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट समूह से जुड़े जिहादियों से लड़ने के प्रयासों में नाइजर को अपने आखिरी विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखते हैं। फ्रांस के नाइजर में 1,500 सैनिक हैं जो उसकी सेना के साथ संयुक्त अभियान चलाते हैं और अमेरिका एवं अन्य यूरोपीय देशों ने नाइजर के सैनिकों को प्रशिक्षित करने में मदद की है।

नए सैन्य जनरल ने किया तख्तापलट

नाइजर में सरकार का तख्तापलट करने वाले देश के नए सैन्य शासक जनरल अब्दुर्रहमान त्चियानी ने पड़ोसी देशों को उनके देश में हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दी और देशवासियों से राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार रहने की अपील की। त्चियानी ने बुधवार रात को टेलीविजन पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संबोधन में अन्य देशों को हस्तक्षेप नहीं करने और तख्तापलट के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दी। त्चियानी ने कहा कि नाइजर को भविष्य में मुश्किल समय का सामना करना होगा और उनके शासन का विरोध करने वालों के ‘‘शत्रुतापूर्ण एवं कट्टर’’ रवैये से देश को कोई लाभ नहीं होगा।

नाइजर की सेना ने किया ये ऐलान

नाइजर के जनरल ने पिछले सप्ताह पश्चिम अफ्रीकी देशों के आर्थिक समुदाय (ईसीओडब्ल्यूएस) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को अवैध, अनुचित, अमानवीय एवं अप्रत्याशित बताया। ईसीओडब्ल्यूएस ने नजरबंद अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को रिहा करके छह अगस्त तक बहाल नहीं किए जाने की स्थिति में बल प्रयोग करने की भी धमकी दी है। त्चियानी ने कहा, ‘‘हम आह्वान करते हैं कि नाइजर के लोग एकजुट होकर उन सभी को हराएं, जो कड़ी मेहनत करने वाले हमारे देश के लोगों को अकथनीय पीड़ा पहुंचाना चाहते हैं और हमारे देश को अस्थिर करना चाहते हैं।’’ उन्होंने नाइजर के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को अपदस्थ करने के बाद चुनाव कराकर सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की परिस्थितियां पैदा करने का वादा भी किया। त्चियानी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब नाइजर में तख्तापलट के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।  (एपी)

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