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इजरायल और लेबनान में सीजफायर के बाद बदले हालात, घर लौट रहे हैं हजारों परिवार

इजरायल और लेबनान में सीजफायर होने के बाद भारी संख्या में लोग अपने घरों की तरफ लौट रहे हैं। लोग ऐसा तब कर रहे हैं जब लेबनानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सीजफायर के तुरंत बाद लोगों को अपने घरों में नहीं लौटना चाहिए।

Situation After Israel Lebanon Ceasefire- India TV Hindi
Image Source : AP Situation After Israel Lebanon Ceasefire

बेरूत: अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान में हुए सीजफायर के बाद बेरूत समेत कई इलाकों में शांति दिख रही है। दोनों देश फिलहाल 10 दिनों के संघर्ष विराम पर सहमत हुए हैं। भले ही सीजफायर महज 10 दिनों का हुआ है लेकिन इससे हजारों विस्थापितों ने राहत की सांस ली है। अब हालात ऐसे हैं कि भारी संख्या में विस्थापित परिवारों ने घर वापसी का सफर शुरू कर दिया है।

सीजफायर के बाद कैसा दिखा मंजर?

शुक्रवार सुबह के समय दक्षिण की ओर जाने वाले रास्ते पर कारों की लंबी कतारें नजर आईं। कारों की ये कतार लिटानी नदी पर बने क्षतिग्रस्त कासमीयेह पुल तक थी। यह पुल दक्षिणी तटीय शहर तायर को उत्तर से जोड़ने वाला एक अहम रास्ता है। घर के सामानों से लदी गाड़ियां धीरे-धीरे आगे बढ़ती हुई नजर आईं। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुई जंग की वजह से लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे।

लोगों ने चेतावनी को किया दरकिनार

लेबनानी अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि सीजफायर के तुरंत बाद लोगों को अपने घरों को लौटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अधिकारियों की इस चेतावनी को दरकिनार कर संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ही भारी संख्या में लोग दक्षिणी लेबनान की ओर बढ़ने लगे। कई लोग जब अपने घरों तक पहुंचे तो वहां उन्हें तबाह हो चुके अपार्टमेंट, टूटी सड़कें और लटकती हुई तारें नजर आईं।

लोगों ने क्या कहा?

ऐसे हालात में 23 साल की जैनब ने कहा, "वापस आकर मुझे आजादी का एहसास हो रहा है। लेकिन देखो, उन्होंने सबकुछ तबाह कर दिया है। चौक, घर, दुकानें, सबकुछ।'' कई लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि उनका यह कठिन दौर सचमुच खत्म हो गया है। 27 वर्षीय मेडिकलकर्मी अली वहदान ने कहा कि इजरायल शांति नहीं चाहता है। जंग के पहले हफ्ते के दौरान इजरायल के एक हवाई हमले में वो बुरी तरह घायल हो गए थे।  उन्होंने कहा, "काश हालात कुछ और होते, लेकिन यह जंग जारी रहेगी।"

हिजबुल्लाह और ईरान का समर्थन

बेरूत के दक्षिण में स्थित हारेत हरेक इलाके में इजरायल के हमलों के बाद पूरी की पूरी इमारतें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। ऐसे हाल में भी 48 साल के अहमद लहम ने मलबे के ढेर पर खड़े होकर हिजबुल्लाह का पीला झंडा लहराया। यह ढेर कभी उनकी अपार्टमेंट बिल्डिंग हुआ करती थी। उन्होंने ईरान की तारीफ की और कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के दबाव की वजह से ही यह संघर्ष विराम हो पाया है। उन्होंने लेबनान की इजरायल के साथ सीधी बातचीत पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा, "सिर्फ ईरानी ही हमारे साथ खड़े रहे, और कोई नहीं।"

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