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चेरनोबिल परमाणु केंद्र पर रूसी हमले के बाद पर मंडराया रेडिएशन का खतरा, 40 साल पहले यहीं हुई थी भीषण आपदा

 Published : Apr 17, 2026 02:18 pm IST,  Updated : Apr 17, 2026 02:59 pm IST

यूक्रेन स्थित चेरनोबिल परमाणु केंद्र में 40 साल पहले आई दुनिया की सबसे भयानक आपदा के बाद अब ग्रीनपीस ने बड़े रेडिएशन की चेतावनी जारी की है।

चेरनोबिल परमाणु केंद्र (कीव)- India TV Hindi
चेरनोबिल परमाणु केंद्र (कीव) Image Source : AP

कीवः यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु केंद्र पर रूसी हमले के बाद रेडिएशन का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसे लेकर ग्रीनपीस संगठन ने सख्त चेतावनी जारी की है। आज से 40 साल पहले इसी परमाणु केंद्र पर दुनिया की सबसे भयानक परमाणु आपदा हुई थी। अब इसकी 40वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर ग्रीनपीस ने गंभीर चेतावनी जारी की है। ग्रीनपीस ने कहा है कि चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में बनी आंतरिक विकिरण सेल के ‘अनियंत्रित ढहने’ का खतरा बढ़ गया है।

आंतरिक विकिरण सेल ढहने से क्या हो सकता है?

ऐसी कोई दुर्घटना होने पर अत्यधिक रेडियोएक्टिव धूल पर्यावरण में फैल सकती है, जिससे दशकों से चल रहे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रयास व्यर्थ हो सकते हैं। 14 अप्रैल को जारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में ग्रीनपीस ने कहा कि 1986 के विस्फोट के तुरंत बाद जल्दबाजी में बनाए गए स्टील और कंक्रीट के ‘सरकोफैगस’ के स्ट्रक्चर की मजबूती तेजी से खराब हो रही है। इस आंतरिक सेल को कई साल पहले हटाना था, लेकिन यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण यह प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए रुक गई है। 

रूसी हमले ने बढ़ाया खतरा

चेरनोबिल संयंत्र के अवशेषों को दो परतों से ढका गया है। पहली पुरानी आंतरिक स्टील-कंक्रीट शेल (सरकोफैगस) और दूसरी आधुनिक उच्च तकनीक वाली बाहरी सेल जिसे न्यू सेफ कन्फाइनमेंट (NSC) कहा जाता है। कीव ने आरोप लगाया है कि 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद से रूस ने बार-बार इस स्थल को निशाना बनाया है। पिछले साल एक हमले में बाहरी सेल को भी छेद दिया गया था। ग्रीनपीस की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मरम्मत के बावजूद न्यू सेफ कन्फाइनमेंट की सुरक्षा क्षमता पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है। 

पर्यावरण में हुआ रेडियोएक्टिव रिसाव तो जा सकती हैं सैकड़ों जान

ग्रीनपीस यूक्रेन के सीनियर न्यूक्लियर विशेषज्ञ शॉन बर्नी ने कहा, “अगर आंतरिक सरकोफैगस ढह गया तो पर्यावरण में रेडियोएक्टिविटी का रिसाव होगा, जो विनाशकारी होगा। इससे सैकड़ों जान जा सकती हैं। सरकोफैगस के अंदर चार टन अत्यधिक रेडियोएक्टिव धूल, ईंधन पैलेट और भारी मात्रा में रेडियोएक्टिव पदार्थ मौजूद हैं।” उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान में न्यू सेफ कन्फाइनमेंट की मरम्मत नहीं हो पा रही है, इसलिए यह अपनी डिजाइन के अनुसार काम नहीं कर सकता। इससे रेडियोएक्टिव रिसाव की आशंका बनी हुई है।” ग्रीनपीस ने कहा कि आंतरिक सेल के अस्थिर हिस्सों को हटाना जरूरी है, वरना उनका अनियंत्रित पतन हो सकता है। लेकिन युद्ध के कारण साइट पर कोई काम लगभग असंभव हो गया है। बर्नी ने कहा कि रूस अब भी चेरनोबिल के ऊपर मिसाइलें दाग रहा है।

सीधे चेरनोबिल पर रॉकेट गिरना खतरनाक

आपदा के 40 साल बाद भी रूस यूक्रेन और यूरोप के लोगों के खिलाफ प्रभावी रूप से परमाणु युद्ध कर रहा है। संयंत्र के निदेशक सेर्गेई ताराकानोव ने कहा कि स्थल के आसपास की स्थिति बहुत खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी दी, “अगर कोई रॉकेट सीधे सेफ कन्फाइनमेंट पर नहीं भी गिरा, बल्कि 200 मीटर दूर भी गिरा, तो यह भूकंप जैसा प्रभाव पैदा कर सकता है, जिससे आंतरिक से के ढहने का खतरा बढ़ जाएगा।” ताराकानोव ने कहा कि 1986 की दुर्घटना ने हमें सिखाया कि रेडियोएक्टिव कण सीमाओं को नहीं मानते। पिछले महीने फ्रांस ने कहा था कि 2025 में रूसी हमले के बाद चेरनोबिल की सुरक्षा गुंबद  की मरम्मत के लिए लगभग 500 मिलियन यूरो (करीब 4500 करोड़ रुपये) की जरूरत है।

चेरनोबिल में 40 साल पहले क्या हुआ था?

26 अप्रैल 1986 को यूक्रेन (तत्कालीन सोवियत संघ) के चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दुनिया का सबसे भयानक परमाणु हादसा हुआ था। रिएक्टर नंबर 4 के रखरखाव परीक्षण के दौरान सुरक्षा प्रणाली बंद होने और मानवीय गलतियों के कारण रिएक्टर में भयंकर विस्फोट हो गया। रिएक्टर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह उड़ गया और भारी मात्रा में रेडियोएक्टिव पदार्थ हवा में फैल गए। यह आग कई दिनों तक जलती रही। इस दुर्घटना में तत्काल 31 लोग मारे गए, लेकिन विकिरण के कारण हजारों लोग बाद में कैंसर और अन्य बीमारियों से मरे। लाखों लोग विस्थापित हुए। चेरनोबिल आज भी दुनिया की सबसे खतरनाक परमाणु दुर्घटना मानी जाती है, जिसके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभाव आज भी जारी हैं।

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