पेरिसः ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) को यूरोपीय संघ ने अब आतंकवादियों की सूची में डालने का फैसला किया है। फ्रांस ने भी ईरान के शक्तिशाली इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को यूरोपीय संघ (EU) की आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की दिशा में बढ़ते प्रयासों का समर्थन करने का फैसला किया है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने बुधवार को यह घोषणा की, जिसमें ईरानी शासन द्वारा विरोध प्रदर्शनों पर घातक दमन का हवाला दिया गया, जिससे हजारों लोगों की मौत हुई है।
किस देश ने पेश किया प्रस्ताव?
फ्रांस 24 न्यूज के अनुसार राष्ट्रपति भवन (एलिसी पैलेस) ने कहा, "फ्रांस ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को यूरोपीय आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने का समर्थन करता है।" विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोत ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, "ईरानी लोगों के शांतिपूर्ण विद्रोह पर अकल्पनीय दमन का जवाब दिया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि ईरानी लोगों की बहादुरी और उन पर की गई अंधाधुंध हिंसा व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। पहले फ्रांस इस कदम से हिचकिचाता रहा था, क्योंकि इससे तेहरान के साथ सभी संबंध टूटने का खतरा था। लेकिन अब इटली के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव को फ्रांस, जर्मनी और स्पेन जैसे प्रमुख देशों का समर्थन मिल गया है।
अमेरिका समेत ये देश पहले ही IRGC को घोषित कर चुके हैं आतंकी
अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ईरान के IRGC को पहले से ही आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। मगर EU और यूके ने अभी तक ऐसा नहीं किया था। अब EU की इस सूची में शामिल होने पर यूरोपीय परिषद के नियमों के अनुसार IRGC के सदस्यों पर यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति जब्ती और फंड उपलब्ध कराने पर रोक लगेगी। बुधवार को जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी इटली के प्रयास का समर्थन किया और कहा कि EU में अभी भी एक-दो देश तैयार नहीं हैं, लेकिन अब फ्रांस के साथ यह फैसला गुरुवार को राजनीतिक रूप से मंजूर होने की संभावना है। EU विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि विदेश मंत्रियों की बैठक में इस पर सहमति बनने की उम्मीद है।
आईआरजीसी पर क्यों घड़का यूरोपीय संघ
ईरान में नवंबर-दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन जीवनयापन की लागत बढ़ने से भड़क गए और धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गए। आरोप है कि ईरान ने इन पर हिंसक कार्रवाई की। इस दौरान 2 सप्ताह से अधिक समय तक इंटरनेट ब्लैकआउट रहा। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार इसमें कम से कम 6,221 लोग मारे गए, जिनमें 5,858 प्रदर्शनकारी, 214 सरकारी बलों से जुड़े, 100 बच्चे और 49 गैर-प्रदर्शनकारी नागरिक शामिल हैं। कुल 42,300 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। हालांकि ईरानी सरकार के अनुसार 3,117 मौतें हुईं। अन्य मारे गए लोगों को ईरान ने "आतंकवादी" बताया। मगर यूरोप इसे सच नहीं मानता। इसलिए यह कदम उठाने का ऐलान किया।
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