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छोटी कारों की कीमत 4000 रुपये तक बढ़ेगी, गडकरी ने की सुरक्षा के लिए छह एयरबैग्‍स को अनिवार्य बनाने की वकालत

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Sep 20, 2021 11:29 am IST,  Updated : Sep 20, 2021 11:35 am IST

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब वाहन उद्योग ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि ऊंचे कराधान तथा सख्त सुरक्षा और उत्सर्जन नियमों की वजह से उनके उत्पाद महंगे हो गए हैं।

small cars cost will increase by Rs 3000 to 4000, Gadkari says Small cars too need 6 airbags - India TV Hindi
small cars cost will increase by Rs 3000 to 4000, Gadkari says Small cars too need 6 airbags Image Source : PIXABAY

नई दिल्‍ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि छोटी कारों में भी सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त संख्या में एयरबैग होने चाहिए। आमतौर पर छोटी कारों की खरीद कम आय वर्ग वाले मध्यवर्गीय लोगों द्वारा की जाती है। गडकरी ने सवाल किया कि वाहन कंपनियां सिर्फ अमीर लोगों द्वारा खरीदी जाने वाली बड़ी कारों में ही आठ एयरबैग क्यों उपलब्ध कराती हैं। गडकरी ने कहा कि छोटी सस्ती कारों में अधिक एयरबैग की अपील वह सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं।

उन्होंने इस बात को स्वीकार किया अतिरिक्त एयरबैग से छोटी कारों की लागत कम से कम 3,000 से 4,000 रुपये बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे देश में गरीबों को भी पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए। बेबाकी से अपनी राय रखने वाले गडकरी ने कहा कि अमीर लोगों के लिए आप आठ एयरबैग देते हैं। सस्ती कारों के लिए आप सिर्फ दो-तीन एयरबैग की पेशकश करते हैं। ऐसा क्यों? 

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब वाहन उद्योग ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि ऊंचे कराधान तथा सख्त सुरक्षा और उत्सर्जन नियमों की वजह से उनके उत्पाद महंगे हो गए हैं। गडकरी ने कहा कि छोटी कारों की खरीद निम्न मध्यम आय वर्ग के लोगों द्वारा की जाती है। यदि उनकी कारों में एयरबैग नहीं होगा, तो दुर्घटना की स्थिति में उनकी जान जा सकती है। ऐसे में मैं सभी कार विनिर्माताओं से अपील करूंगा कि वे अपने वाहनों के सभी संस्करणों में कम से कम छह एयरबैग उपलब्ध कराएं।

डीजल वाहनों के खिलाफ पूर्वाग्रह ‘तर्कहीन’, शहरों में मुक्त आवाजाही की मंजूरी हो

फोर्स मोटर्स ने डीजल से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों के खिलाफ अवैज्ञानिक और बेबुनियाद पूर्वाग्रह होने की बात करते हुए शहरों के भीतर इन वाहनों की मुक्त आवाजाही की मांग की है। वाणिज्यिक, यात्री और कृषि वर्ग में डीजल से चलने वाले वाहन बेचने वाली पुणे की कंपनी ने 2020-21 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि डीजल वाहन देश के अनिवार्य नियमों को पूरा करते हैं और उस वजह से उनकी आवाजाही को प्रतिबंधित करने का कोई मतलब नहीं बनता।

वाहन निर्माता कंपनी ने कहा कि डीजल से चलने वाले उन वाहनों के इस्तेमाल पर लगे स्थानीय क्षेत्र के बेबुनियाद प्रतिबंध अतार्किक हैं जो वास्तव में राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य मानदंडों को पूरा करते हैं। जहां वाहन के सभी वर्गों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य हासिल कर शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने का उद्देश्य पूरा करने में कम से कम एक दशक का समय लगेगा, अनिवार्य मानदंडों को पूरा करने वाले डीजल वाहन शहरों के भीतर भी एक उत्कृष्ट समाधान हैं।

कंपनी ने कहा कि इस संबंध में अवैज्ञानिक और बेबुनियाद पूर्वाग्रहों को दूर करने की जरूरत है। गौरतलब है कि वायु प्रदूषण में वृद्धि के डर से, कई राज्य शहरों के भीतर या उन हिस्सों में डीजल इंजन वाले वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही की मंजूरी नहीं देते हैं जहां वे पर्यावरण के अनुकूल वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं। पिछले महीने, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन निर्माताओं से डीजल इंजन वाले वाहनों के उत्पादन और बिक्री को हतोत्साहित करने एवं अन्य तकनीकों को बढ़ावा देने की अपील की थी। 

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