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BSNL-MTNL को लेकर बड़ा फैसला, 69 हजार करोड़ रुपए की पुनरुत्थान योजना पर अमल के लिए मंत्रीसमूह गठित

सरकारी दूरसंचार कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के पुनरुत्थान के लिए घोषित 69 हजार करोड़ रुपए की योजना को अमल में लाने और उस पर नजर रखने के लिए सात सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया गया है।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Updated on: December 28, 2019 18:48 IST
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BSNL और MTNL को लेकर लिया गया बड़ा फैसला

नयी दिल्ली। सरकारी दूरसंचार कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के पुनरुत्थान के लिए घोषित 69 हजार करोड़ रुपए की योजना को अमल में लाने और उस पर नजर रखने के लिए सात सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया गया है। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) को उबारने के लिए हाल में लिए गए निर्णयों पर सरलता और तेजी के साथ अमल करने के लिए उच्चस्तरीय समूह का गठन किया गया है। इन निर्णयों में 4जी स्पेक्ट्रम का आवंटन तथा संपत्तियों की बिक्री आदि शामिल है। 

सूत्रों के अनुसार, मंत्री समूह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'पुनरुत्थान पैकेज में कारोबारी वहनीयता, कार्यबल, बांड जारी करना, संपत्तियों की बिक्री और 4जी आवंटन आदि जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। मंत्रीसमूह इन योजनाओं की निगरानी करेगा तथा क्रियान्वयन तेज करेगा।' उल्लेखनीय है कि सरकार ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के पुनरुत्थान के लिये इस साल अक्टूबर में 69 हजार करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी थी। योजना में इन दोनों उपक्रमों का विलय करने, संपत्तियों की बिक्री करने और कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृति योजना (वीआरएस) देने जैसे कदमों की घोषणा की गई है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई थी। एमटीएनएल दिल्ली और मुंबई में सेवायें देती है जबकि बीएसएनएल इन दोनों शहरों को छोड़कर पूरे देश में संचार सेवाएं उपलब्ध कराती है। पुनरुत्थान योजना के तहत कर्मचारियों की वीआरएस योजना के तहत अब तक दोनों कंपनियों के करीब 92,700 कर्मचारी इसके लिये आवेदन कर चुके हैं। इससे कंपनियों के वेतन बिल में 8,800 करोड़ रुपए सालाना की बचत होगी। ये कंपनियां अगले तीन साल में अपनी संपत्तियों की बिक्री से 37,500 करोड़ रुपए प्राप्त करेंगी ऐसी योजना है। दोनों कंपनियों पिछले आठ-नौ साल से घाटे में चल रही हैं। 

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