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खरीफ फसलों के उत्‍पादन में बनेगा इस साल बड़ा रिकॉर्ड, 15 करोड़ टन खाद्यान्‍न उत्‍पादन होने की संभावना

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Sep 14, 2021 12:38 pm IST,  Updated : Sep 14, 2021 12:38 pm IST

कृषि मंत्रालय इस साल खरीफ सत्र में खाद्यान्न उत्पादन 15 करोड़ टन से अधिक होने की उम्मीद कर रहा है, जो फसल वर्ष 2020-21 के इसी सत्र में हासिल किए गए 14 करोड़ 95 लाख टन से अधिक है।

Kharif foodgrain output likely to touch record 150 mn tn this year- India TV Hindi
Kharif foodgrain output likely to touch record 150 mn tn this year Image Source : PIXABAY

नई दिल्‍ली। देश में इस साल अच्छी मानसून वर्षा के चलते फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) के खरीफ सत्र में खाद्यान्न उत्पादन 15 करोड़ टन से अधिक के नए रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने सोमवार को यह जानकारी दी। दक्षिण पश्चिम मानसून के आगमन के साथ जून में धान जैसी खरीफ (गर्मी) फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है। यह इस माह के अंत तक समाप्त हो जाएगी। वहीं, देश के अधिकांश भागों में कटाई अक्टूबर से शुरू हो जाएगी।

अग्रवाल ने कहा कि इस साल अब तक अच्छी बारिश हुई है। चौथे अनुमान के अनुसार, पिछले साल कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 14 करोड़ 95 लाख 60 हजार टन रहा। चूंकि इस साल दलहन और धान के रकबे में वृद्धि होने की संभावना है, इसलिए खाद्यान्न उत्पादन निश्चित रूप से पिछले साल खरीफ सत्र के मुकाबले कहीं अधिक होगा। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय इस साल खरीफ सत्र में खाद्यान्न उत्पादन 15 करोड़ टन से अधिक होने की उम्मीद कर रहा है, जो फसल वर्ष 2020-21 के इसी सत्र में हासिल किए गए 14 करोड़ 95 लाख टन से अधिक है।

उन्होंने कहा कि इस खरीफ सत्र के लिए देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का पहला अनुमान 15 सितंबर के आसपास जारी किया जाएगा। अग्रवाल ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले अब तक की बुवाई का रकबा 10 लाख हेक्टेयर कम होने के बावजूद खरीफ खाद्यान्न उत्पादन अधिक होने का अनुमान है, क्योंकि मंत्रालय को सितंबर अंत तक बुवाई के रकबे का अंतर कम होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस साल 10 सितंबर तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 1,096.70 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 1,106.57 लाख हेक्टेयर था।

सचिव ने कहा कि धान और दलहन के खेती के रकबे में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि मोटे अनाज, कपास और मूंगफली जैसी फसलों के क्षेत्र में बड़ी गिरावट आई है। उन्होंने कहा, हालांकि, बुवाई के रकबे में अंतर कम हो रहा है क्योंकि कुछ हिस्सों में बुवाई इस महीने के अंत तक खत्म हो जाएगी। मौजूदा स्थिति को देखते हुए, हम निश्चित रूप से इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं।

अग्रवाल ने यह भी कहा कि राज्यों को खरीफ फसलों की खरीद के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है क्योंकि कुछ राज्यों में इन फसलों की आवक शुरू हो गई है। उदाहरण के लिए कर्नाटक में दलहन की फसल की आवक शुरू हो गई है और राज्य सरकार को लगभग 40,000 टन की खरीद की अनुमति दे दी गई है। सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि वह पराली जलाने के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पराली जलाने से पैदा होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वित्तवर्ष 2021-22 में पंजाब को करीब 235 करोड़ रुपये और हरियाणा को 141 ​​करोड़ रुपये दिए हैं। 

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