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Side Effects: फॉक्सवैगन धांधली के बाद फीकी पड़ी प्लैटिनम की चमक, कीमतें 7 साल के निचले स्तर पर

फॉक्सवैगन में हुई धांधली के चलते ग्लोबल मार्केट में प्लैटिनम की कीमतें 900 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई है, जो कि 2008 के बाद का निचला स्तर है।

Surbhi Jain
Published : Oct 02, 2015 01:23 pm IST, Updated : Nov 30, 2015 04:11 pm IST
Side Effects: फॉक्सवैगन धांधली के बाद फीकी पड़ी प्लैटिनम की चमक, कीमतें 7 साल के निचले स्तर पर- India TV Paisa
Side Effects: फॉक्सवैगन धांधली के बाद फीकी पड़ी प्लैटिनम की चमक, कीमतें 7 साल के निचले स्तर पर

फॉक्सवैगन में हुई धांधली के चलते ग्लोबल मार्केट में प्लैटिनम की कीमतें 900 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई है, जो कि 2008 के बाद का निचला स्तर है।  दरअसल प्लैटिनम का करीब 40 फीसदी इस्तेमाल ऑटो सेक्टर में होता है। फॉक्सवैगन स्कैंडल की खबर 22 सितंबर को सामने आई थी, तब से लेकर शुक्रवार तक प्लैटिनम की कीमतों में 7.50 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। 21 सितंबर को ग्लोबल मार्केट में प्लैटिनम 937 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। इसकी कीमत अब गिरकर 900 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई है। वहीं पिछले एक महीने के दौरान प्लैटिनम की कीमतों में करीब 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। फॉक्सवैगन धांधली की वजह से प्लैटिनम की डिमांड आगे भी घटने की आशंका है जिससे कीमतों में और गिरावट गहरा सकती है।

एसएमसी ग्लोबल के रिसर्च हेड रवि सिंह ने इंडिया टीवी पैसा के साथ खास बातचीत में बताया कि प्लैटिनम का करीब 40 फीसदी इस्तेमाल ऑटो सेक्टर में किया जाता है। वहीं करीब 33 फीसदी इस्तेमाल ज्वैलरी बनाने में होता है। रवि के अनुसार फॉक्सवैगन स्कैंडल से गाड़ियों की सेल गिरेगी। जबकि इकॉनोमिक स्लोडाउन की वजह से ज्वैलरी की डिमांड भी कमजोर है। ऐसे में मांग पर पड़ती दोहरी मार की वजह से प्लैटिनम की कीमतें 745 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकती हैं।

ओवर स्पलाई से भी कीमतों पर दबाव      

साउथ अफ्रीका की बड़ी माइन में पिछले पांच महीने से चल रहा हड़ताल खत्म हो गई है। इसके कारण मार्केट में प्लैटिनम की सप्लाई बढ़ गई है। वहीं फॉक्सवैगन स्कैंडल के बाद से ट्रेडर्स ने प्लैटिनम में जमकर बिकवाली की है। जिससे कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।

क्या है फॉक्सवैगन स्कैंडल
दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन डीजल कारों में इमिशन टेस्ट को गलत बताने वाले सॉफ्टवेयर को लगाने के आरोप से घिरी है। इसके कारण कंपनी को 18 बिलियन डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा है। इसके बावजूद कंपनी की मुश्किलें अभी भी थमती नहीं दिख रही हैं। कंपनी को नया सीईओ कोमिलने के बाद राहत मिलने की संभावनाएं बढ़ी थीं, लेकिन सीईओ के कुर्सी संभालते ही स्कैडल का आकार और भी विकराल रुप ले चुका है। फॉक्सवैगन की डीजल गाड़ियों का इतना बड़ा स्कैम सामने आने के एक दिन बाद ही मार्टिन विंटरकॉर्न ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद कंपनी ने पोर्शे के चेयरमैन मैथियास मुलर को फॉक्सवैगन ग्रुप का सीईओ बना दिया।

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