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मनरेगा में फर्जी नाम पर पैसा निकालने लेने वाले हो जाएं सावधान! सरकार ने यह निर्णय लिया

मनरेगा में जबर्दस्त ‘फर्जीवाड़ा’ हो रहा है तथा बिचौलिए योजना के तहत लाभार्थियों के नाम दर्ज करने के लिए पैसे ले रहे हैं।

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: February 13, 2022 15:48 IST
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Photo:FILE

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Highlights

  • मनरेगा में जबर्दस्त ‘फर्जीवाड़ा’ हो रहा है
  • लाभार्थी बिचौलिए को कुछ हिस्सा दे रहा है
  • मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करना है

नई दिल्ली। केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को सख्त बनाने की तैयारी कर रही है, क्योंकि पिछले दो वर्षों के दौरान इस योजना के तहत ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम में काफी गड़बड़ियां या धांधली देखने को मिला है। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। केंद्र ने 2022-23 के लिए मनरेगा के तहत 73,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (आरई) में दिए गए 98,000 करोड़ रुपये से 25 प्रतिशत कम है। अगले वित्त वर्ष के लिए आवंटन, चालू वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान (बीई) के बराबर है। 

दलाल कर रहे हैं फर्जीवाड़ा

अधिकारी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में बीई के मुकाबले  आवंटन काफी अधिक रहा है और यह पाया गया कि इसमें जबर्दस्त ‘फर्जीवाड़ा’ हो रहा है तथा बिचौलिए योजना के तहत लाभार्थियों के नाम दर्ज करने के लिए पैसे ले रहे हैं। अधिकारी ने बताया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सीधे व्यक्ति तक धन पहुंचाने में सफल रहा है, लेकिन फिर भी ऐसे बिचौलिए हैं, जो लोगों से कह रहे हैं कि मैं आपका नाम मनरेगा सूची में डाल दूंगा, लेकिन आपको नकद हस्तांतरण के बाद वह राशि मुझे वापस देनी होगी। यह बड़े पैमाने पर हो रहा है।

ग्रामीण मंत्रालय सख्ती करेगा 

उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय इस पर सख्ती करेगा। अधिकारी ने कहा कि लाभार्थी और बिचौलियों के बीच यह साठगांठ है कि चूंकि लाभार्थी बिचौलिए को कुछ हिस्सा दे रहा है, इसलिए वह काम पर भी नहीं जाएगा और इसलिए कोई काम नहीं हो रहा है। अधिकारी ने कहा, सरकार पिछले दो वर्षों में मनरेगा कोष आवंटित करने में बहुत उदार रही है। हमने 2020-21 में 1.11 लाख करोड़ रुपये जारी किए, जबकि 2014-15 में यह आंकड़ा 35,000 करोड़ रुपये था।

कोरोना को देखते हुए आवंटन बढ़ाया गया था

2020 में लॉकडाउन के दौरान, इस योजना को गति दी गई थी और  इसमें अब तक का सबसे अधिक 1.11 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया था, जो कि 61,500 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अधिक था। मनरेगा का उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटी मजदूरी रोजगार प्रदान करना है, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से काम करते हैं।

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