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वित्तीय संकट का सामना कर रही गो फर्स्ट को मिली बड़ी राहत, इस समय 25 विमान उड़ान नहीं भर रहे

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Nov 29, 2022 02:38 pm IST,  Updated : Nov 29, 2022 02:39 pm IST

कई विमानों के उड़ान न भरने के साथ ही विमानन कंपनी उड़ान में देरी और प्रस्थान समय में बदलाव जैसी समस्याओं से जूझ रही है।

गो फर्स्ट- India TV Hindi
गो फर्स्ट Image Source : FILE

एयरलाइंस कंपनी गो फर्स्ट को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, कई मोर्चों पर वित्तीय संकट  का सामना कर रही विमानन कंपनी गो फर्स्ट को एक सरकारी योजना के तहत अतिरिक्त 400 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके साथ ही उम्मीद है कि आने वाले सप्ताह में कंपनी को 16 नए पीएंडडब्ल्यू इंजन मिल जाएंगे, जिसके बाद वह अधिक विमानों का परिचालन कर सकेगी। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। गो फर्स्ट के कम से कम 25 विमान इस समय उड़ान नहीं भर रहे हैं। ऐसा मुख्य रूप से प्रैट एंड व्हिटनी (पीएंडडब्ल्यू) इंजन की अनुपलब्धता के कारण है। ये इंजन इसके ए320 बेड़े के लिए जरूरी हैं। 

उड़ान में देरी की समस्या से जूझ रही 

कई विमानों के उड़ान न भरने के साथ ही विमानन कंपनी उड़ान में देरी और प्रस्थान समय में बदलाव जैसी समस्याओं से जूझ रही है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि एयरलाइन को इस महीने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत अतिरिक्त 400 करोड़ रुपये मिले हैं। इस योजना के तहत गो फर्स्ट 1,500 करोड़ रुपये तक ले सकती है और वह अब तक कम से कम कुल 800 करोड़ रुपये का लाभ उठा चुकी है। गो फर्स्ट के प्रवक्ता ने कहा कि 25-26 विमान जमीन पर हैं और इस समय 32 विमान परिचालन में हैं। प्रवक्ता ने कहा कि आने वाले हफ्तों में कंपनी को 16 पीएंडडब्ल्यू इंजन मिलने की उम्मीद है। 

कर्ज लेने की बात कही थी 

इस महीने की शुरुआत में गो फर्स्ट ने अपने परिचालन के लिए जल्द ही 600 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना बनाई थी। यह कर्ज आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत लेने की बात कही गई थी। एयरलाइन के सूत्र ने यह भी कहा कि प्रवर्तकों ने पिछले 15 महीनों में लगभग 2,800 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस निवेश से कंपनी को कई चुनौतियों का सामना करने में मदद मिली, जिसमें महामारी के दौरान उड़ानों पर लगी रोक और उच्च ईंधन लागत शामिल है। सरकार ने पिछले महीने एयरलाइन उद्योग की मदद करने के लिए ईसीएलजीएस के तहत ऋण की सीमा 400 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये कर दी थी।

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