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रहस्‍यमयी योगी से जुड़ी NSE की पूर्व CEO चित्रा रामकृष्ण की मुसीबत बढ़ी, SEBI ने लगाया जुर्माना

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Jun 29, 2022 03:55 pm IST,  Updated : Jun 29, 2022 03:55 pm IST

सेबी ने शेयर ब्रोकर वे टू वेल्थ ब्रोकर्स और जीकेएन सिक्योरिटीज तथा संपर्क इन्फोटेनमेंट एवं उनके कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया है।

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chitra ramkrishna Image Source : FILE

रहस्‍यमयी योगी के इशारे पर काम करने वाली NSE की पूर्व CEO चित्रा रामकृष्ण की मुसीबत बढ़ गई है। सेबी ने 'डार्क फाइबर' मामले में चित्रा रामकृष्ण सेमत कई लोगों पर जुर्माना लगाया है। सेबी ने एनएसई के व्यापार विकास अधिकारी रवि वाराणसी, पूर्व प्रबंध निदेशक और सीईओ चित्रा रामकृष्ण तथा उनके सलाहकार सुब्रमणियम आनंद समेत कुछ शेयर ब्रोकर समेत 18 इकाइयों पर कुल 44 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। 

दो शेयर ब्रोकर भी नपे 

एनएसई और उसके पूर्व अधिकारियों के अलावा सेबी ने शेयर ब्रोकर वे टू वेल्थ ब्रोकर्स और जीकेएन सिक्योरिटीज तथा संपर्क इन्फोटेनमेंट एवं उनके कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया है। नियामक ने एनएसई पर सात करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही रामकृष्ण, वाराणसी और सुब्रमणियम आनंद पर पांच-पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, सेबी ने वेटूवेल्थ ब्रोकर्स पर छह करोड़ रुपये, जीकेएन सिक्योरिटीज पर पांच करोड़ रुपये और संपर्क इंफोटेनमेंट पर तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

45 दिन के अंदर राशि जमा करने का आदेश 

मंगलवार को पारित सेबी के एक आदेश के अनुसार, उन्हें 45 दिनों के भीतर जुर्माने की कुल राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया है। यह मामला एनएसई में 'डार्क फाइबर' के रूप में कुछ ब्रोकिंग कंपनियों को अन्य सदस्यों के मुकाबले सूचना प्राप्त करने को लेकर पहले पहुंच की सुविधा देने से जुड़ा है। इसके तहत उन्हें अन्य सदस्यों का तुलना में ‘कोलेकेशन’ सुविधा से जुड़ने की सुविधा दी गयी थी। नेटवर्क संपर्क के रूप में ‘डार्क फाइबर’ या यूनिट फाइबर से आशय ऐसे नेटवर्क से है, जो पहले से उपलब्ध है लेकिन उसका उपयोग नहीं हुआ है। यह सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक्स / उपकरण से जुड़ा नहीं होता है और उनके माध्यम से आंकड़ों का प्रवाह नहीं होता तथा यह ‘फाइबर ऑप्टिक कम्युनिकेशन’ में उपयोग के लिये उपलब्ध होता है। 

जांच में पता चला कि गलत तरीके से लाभ लिया गया 

बाजार नियामक ने 2009 से 2016 की अवधि के लिए कई संस्थाओं के लेन-देन के संबंध में जांच शुरू की थी ताकि एनएसई द्वारा कुछ स्टॉक ब्रोकरों को इस तरह से जुड़ाव की सुविधा देने के मामले की जांच की जा सके जो निवेशकों या प्रतिभूति बाजार के लिए नुकसादायक हो सकता है। सेबी ने अपने आदेश में कहा, वे टू वेल्थ और जीकेएन ने एनएसई और संपर्क के कर्मचारियों के साथ साठगांठ कर उनके पास उपलब्ध आंकड़ा अन्य के मुकाबले कुछ जल्दी प्राप्त कर अनुचित तरीके से लाभ कमाया। सेबी ने जिन लोगों पर जुर्माना लगाया वे नागेंद्र कुमार एसआरवीएस, देवीप्रसाद सिंह और एमआर शशिभूषण, प्रशांत डिसूजा, ओम प्रकाश गुप्ता, सोनाली गुप्ता, राहुल गुप्ता, नेताजी पाटिल, रीमा श्रीवास्तव, प्रशांत मित्तल, मोहित मुतरेजा हैं। 

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