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लाल सागर संकट से बेकाबू हो सकती है महंगाई, माल ढुलाई लागत 60% और बीमा प्रीमियम 20% बढ़ने की आशंका

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Jan 06, 2024 03:58 pm IST,  Updated : Jan 06, 2024 03:58 pm IST

हूतियों के हमलों में अहम बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया है। बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य एशिया और यूरोप को जोड़ता है। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने जहाज यातायात की सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन’ का गठन किया है और वर्तमान में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत इस क

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लाल सागर Image Source : FILE

लाल सागर में संकट बढ़ने से समुद्री व्यापार पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। वैकल्पिक मार्ग से माल ढुलाई पर लागत 60 प्रतिशत तक और बीमा प्रीमियम 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे एक बार फिर महंगाई बेकाबू हो सकती है क्योंकि इंपोर्टेड वस्तुओं की महंगाई बढ़ने की आशंका है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शनिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि लाल सागर में संकट गहराने से माल ढुलाई में लगने वाले समय में 20 दिन की देरी और लागत में 40-60 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। इससे बीमा प्रीमियम में 15-20 प्रतिशत बढ़ने के अलावा चोरी और हमलों से माल को नुकसान पहुंचने की आशंका भी है। 

जहाज रास्ता बदलकर आवाजाही कर रहे

लाल सागर और भूमध्य सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति यमन स्थित हूती आतंकवादियों के हमलों के कारण बिगड़ गई है। इन हमलों के कारण, जहाज रास्ता बदलकर ‘केप ऑफ गुड होप’ के माध्यम से आवाजाही कर रहे हैं। इससे लगभग 20 दिनों की देर हो रही है और माल ढुलाई एवं बीमा लागत भी बढ़ रही है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रिपोर्ट में कहा कि हूती हमलों के कारण लाल सागर व्यापारिक मार्ग में व्यवधान आने से भारतीय व्यापार, खासकर पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के साथ कारोबार पर काफी प्रभाव पड़ा है। इसके मुताबिक, भारत, कच्चे तेल और एलएनजी आयात और प्रमुख क्षेत्रों के साथ व्यापार के लिए बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर बहुत अधिक निर्भर है। ऐसे में इस क्षेत्र में कोई भी गतिरोध आने से भारी आर्थिक और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

113 अरब डॉलर का कारोबार इसी मार्ग से हुआ

जीटीआरआई का अनुमान है कि यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के साथ भारत के समग्र उत्पाद व्यापार का लगभग 50 प्रतिशत आयात और 60 प्रतिशत निर्यात यानी कुल 113 अरब डॉलर का कारोबार इसी मार्ग से हुआ है। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही बदलने से माल ढुलाई कॉस्ट बढ़ जाएगी। इनकी एक दिन की लागत 60,000 डॉलर बैठती है। इंडिया-यूरोप रूट पर कंटेनर की कॉस्ट 1.5 से दोगुना बढ़ जाएगी। वहीं, कैपेसिटी में कम से कम 20 से 25 फीसदी असर देखने को मिल सकता है। इसके चलते महंगाई बढ़ने का खतरा है। 

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