अमेरिका के बाद चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह तेज निर्यात वृद्धि मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान स्पेन को निर्यात में 56 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई और ये पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 3 अरब डॉलर से बढ़कर 4.7 अरब डॉलर हो गया।
भारत का निर्यात 2020 में लगभग 276.5 अरब डॉलर था, जो 2021 में बढ़कर 395.5 अरब डॉलर और 2022 में 453.3 अरब डॉलर हो गया था।
क्रेडिट गारंटी योजना के विस्तार के तहत NCGTC सदस्य वित्तीय संस्थानों को पात्र निर्यातकों और एमएसएमई को 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त ऋण सुविधा देने पर 100 प्रतिशत ऋण गारंटी कवरेज प्रदान करेगी।
अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने के बाद जब भारत के एक्सपोर्ट पर खतरा मंडराया, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह झटका भारत के लिए एक नए मौके में बदल जाएगा। अमेरिका से दूरी बनते ही भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और समुद्री उत्पादों की मांग दूसरे देशों में तेजी से बढ़ गई।
अप्रैल-सितंबर अवधि में विदेशी बाजारों में यूटिलिटी वाहनों का निर्यात 26 प्रतिशत बढ़कर 2,11,373 यूनिट हो गया।
गैर-अमेरिकी बाजारों में भारत का निर्यात सितंबर में 10.9 प्रतिशत बढ़ा, जो अगस्त, 2025 में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि से काफी बेहतर है।
अगस्त में वस्तुओं और सेवाओं के एक्सपोर्ट की कुल कीमत 69.16 अरब डॉलर रही, जबकि इंपोर्ट 79.04 अरब डॉलर रहा। इस तरह देश का व्यापार घाटा 9.88 अरब डॉलर रहा।
अनंत नागेश्वरन ने कहा कि टैरिफ लागू होने के बाद ''पिछले तीन-चार दिनों से कई एक्सपोर्ट और प्रतिनिधि निकायों, प्राइवेट सेक्टर की एक्सपोर्ट प्रोमोशन एजेंसियों और मंत्रालयों के साथ बातचीत चल रही है।''
ये खबर ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका ने रूस से लगातार कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत पर अभी हाल ही में 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है।
भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है, लेकिन इन 40 देशों में असली अवसर हैं। यहां करीब 590 अरब डॉलर का वस्त्र और परिधान आयात होता है।
प्रस्तावित मिशन का उद्देश्य अगले 6 सालों (वित्त वर्ष 2025-31) में व्यापक, समावेशी और टिकाऊ निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 जुलाई को भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो आज यानी 7 अगस्त से लागू हो गया है।
भारत ने बताया कि 2024 में रूस के साथ यूरोपीय संघ का द्विपक्षीय व्यापार 67.5 बिलियन यूरो तक पहुंच गया, जिसमें 16.5 मिलियन टन एलएनजी भी शामिल है, जो रूस के साथ उसके अपने व्यापार की मात्रा से भी ज्यादा है।
इस मिशन के 5 अलग-अलग घटक होंगे- जिनमें ट्रेड फाइनेंस, स्टैंडर्ड और मार्केट एक्सेस से संबंधित नॉन-फाइनेंस ट्रेड, ब्रांड इंडिया के लिए बेहतर ब्रांड रिकॉल, ई-कॉमर्स हब एवं वेयरहाउसिंग और व्यापार सुविधा होंगे।
अधिकारी ने बताया कि मछली पालन, इंजीनियरिंग, आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों के एक्सपोर्टर भी इस विचार-विमर्श में हिस्सा लेंगे।
कैनालिस की रिसर्च के मुताबिक, चीन के साथ व्यापार वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण सप्लाई चेन को तैयार करने का काम तेज हुआ है।
विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) 2023 में, डीजीएफटी ने ‘जिला निर्यात केंद्र’ पहल को शामिल किया है।
भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। भारतीय दल इस समझौते के लिए पांचवें दौर की बातचीत के लिए वाशिंगटन में है।
वाणिज्य मंत्रालय की एक शाखा, व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) की सिफारिशों के बाद शुल्क लगाए गए। भारत और चीन दोनों ही बहुपक्षीय संगठनों के सदस्य हैं, जो वैश्विक व्यापार मानदंडों से निपटते हैं।
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