पैकेजिग सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी की दृष्टि से पांचवां स्थान है। पैकेजिंग इंडस्ट्री कई उद्योगों के लिए वैल्यू एडेड सेवाएं (वैल्यू एडेड सर्विसेज) देती है। इसमें मैन्यूफैक्चरिंग, फार्मा, रिटेल, एफएमसीजी जैसे कई नाम शामिल हैं।
मारुति सुजुकी इंडिया 1.31 लाख से अधिक वाहनों के निर्यात के साथ इस खंड में सबसे आगे रही।
ब्रिटेन द्वारा भारत की स्टील पर प्रतिबंध लगाने से भारत को जो नुकसान होगा उसकी भरपाई ब्रिटेन से आने वाले उत्पादों पर सीमा शुल्क बढाकर पूरी की जाएगी।
Trade Deficit: चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में भारत का व्यापारिक घाटा 124.7 अरब डॉलर था। यह किसी भी साल के इस अवधि में अब तक का सर्वाधिक घाटा है।
वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है कि अगस्त, 2021 में व्यापार घाटा 11.71 अरब डॉलर था।
Rice Export Ban: गैर-बासमती चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाने के बाद सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से टुकड़ा चावल (Rice) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
Report: विश्व व्यापार संगठन ने अप्रैल में अनुमान जारी करके कहा था कि विश्व व्यापार 4.7 फीसदी की दर से बढ़ेगा लेकिन अब 2022 में इसके तीन फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है।
चालू वित्त वर्ष में देश का कुल निर्यात 450 अरब डॉलर के पार जाने की उम्मीद है।
वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में यात्री वाहनों का निर्यात बढ़कर 1,60,263 इकाई पर पहुंच गया।
चालू वित्त वर्ष (2022-23) के अप्रैल-मई माह के दौरान संचयी निर्यात लगभग 25 प्रतिशत बढ़कर 78.72 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।
वित्त वर्ष 2020-21 में भारत ने 32.21 करोड़ डॉलर यानी लगभग 2507 करोड़ रुपए की 47 लाख टन शराब और बीयर समेत अन्य पेय पदार्थों का निर्यात किया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक है।
वस्तुओं का निर्यात 2021-22 में 21 मार्च तक 37 प्रतिशत बढ़कर 400.8 अरब डॉलर पहुंच गया।
वित्त वर्ष 2020-21 में यह 292 अरब डॉलर रहा था। निर्यात के मामले में भारत का पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2018-19 में 330.07 अरब डॉलर का रहा था।
आयात और निर्यात के बीच अंतर को बताने वाला व्यापार घाटा फरवरी 2021 में 13.12 अरब डॉलर रहा था।
मंत्रालय के अनुसार, कुल मिलाकर निर्यात चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 माह (अप्रैल-फरवरी) के दौरान 46.73 प्रतिशत बढ़कर 335.88 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।
हालांकि बता दें कि बीते साल कोरोना संकट के चलते उत्पादन और निर्यात दोनों ही काफी प्रभावित हुए थे। जिसके कारण यह वृद्धि चौंकाने वाली दिख रही है।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत का वस्तुओं का निर्यात अप्रैल-नवंबर, 2021 में 262.46 अरब डॉलर रहा।
भारतीय आम फिलहाल अमेरिका को निर्यात योग्य नहीं है। लेकिन अब इसके निर्यात की संभावना बनी है
चालू वित्त वर्ष में निर्यात वृद्धि की रफ्तार अच्छी चल रही है। ऐसे में 400 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है। अक्टूबर में निर्यात 43 प्रतिशत के उछाल के साथ 35.65 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।
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