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Trade Deficit: Make in India पर जोर के बावजूद चीन से बढ़ रहा आयात, रिकॉर्ड उंचाई पर पहुंचा भारत का व्यापार घाटा

Edited By: Vikash Tiwary @ivikashtiwary Published : Sep 22, 2022 01:07 pm IST, Updated : Sep 22, 2022 01:15 pm IST

Trade Deficit: चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में भारत का व्यापारिक घाटा 124.7 अरब डॉलर था। यह किसी भी साल के इस अवधि में अब तक का सर्वाधिक घाटा है।

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Photo:INDIA TV Make in India पर जोर के बावजूद चीन से बढ़ रहा आयात

Trade Deficit: चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में भारत का व्यापारिक घाटा 124.7 अरब डॉलर था। यह किसी भी साल के इस अवधि में अब तक का सर्वाधिक घाटा है। अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, विशेष रूप से ऊर्जा ने व्यापार घाटे को बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभाई है, वहीं दूसरी तरफ यह भी आशंका जताई जाती है कि चीनी आयात बढ़ रहा है। हालांकि भारत सरकार का जोर मेक इन इंडिया पर है। सरकार भारत में ही चीन से आयात होने वाली अधिकतर चीजें बनाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार के तरफ से कई सारी योजनाएं भी शुरु की गई है। उसके बावजूद भी व्यापारिक घाटे को कम करने में कोई खास मदद नहीं मिल रही है।

तेल कीमतों की है बड़ी भूमिका

चूंकि कच्चा तेल भारत के सबसे बड़े आयातों में से एक है, इसलिए व्यापार खाते को हमेशा पेट्रोलियम उत्पादों के साथ ट्रैक किया जाता है। पहली छमाही के लिए सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) डेटाबेस के आंकड़े बताते हैं कि 2022-23 में भारत का व्यापार घाटा सबसे अधिक है। पेट्रोलियम की खरीद पर खर्च होने वाले डॉलर व्यापार घाटे का एक बड़ा हिस्सा है। व्यापार घाटे को जीडीपी के साथ देखकर और आसानी से समझा जा सकता है, हालांकि सितंबर तिमाही के जीडीपी के आंकड़े नवंबर में उपलब्ध होंगे। अभी संभव नहीं है।

चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे में वृद्धि के क्या कारण हैं?

व्यापार घाटा मुख्य रुप से दो बातों पर निर्भर करता है। पहला निर्यात और दूसरा आयात। भारत के व्यापार घाटे के मामले में आयात इतनी तेजी से बढ़ा है कि भारत के व्यापारिक निर्यात में वृद्धि के बावजूद व्यापार घाटा बढ़ गया है (इसमें भारत के आईटी निर्यात से आय शामिल नहीं है, जो सेवाओं के अंतर्गत आता है)। न केवल चीनी आयात में वृद्धि हुई है बल्कि चीन को भारत का निर्यात भी गिर गया है। जहां तक ​​चीन के साथ भारत के व्यापार संतुलन का सवाल है तो यह दोहरी मार साबित हुई है। इसे अगर आपको आसान भाषा में समझाया जाए तो मान लीजिए भारत चीन से 100 रुपये का समान खरीदता है, लेकिन उसे वापस से 100 रुपये का समान बेच नहीं पा रहा है। यही कारण है कि भारत का व्यापारिक घाटा बढ़ता जा रहा है। 

चीन से भारत सबसे अधिक क्या खरीदता है?

चीन से भारत का आयात(खरीद) बास्केट दिवाली की रोशनी और घरेलू उपभोक्ता वस्तुओं जैसे सामानों की तुलना में अधिक है और इसमें पूंजीगत सामान और उच्च प्रौद्योगिकी उत्पाद भी शामिल है। इसमें से विद्युत मशीनरी और उपकरण, परमाणु रिएक्टरों के पुर्जे, और यांत्रिक उपकरण और कार्बनिक रसायन चीन में ही तैयार किए जाते हैं, जिसे भारत में आयात होता है। चीन से भारत जिन प्रोडक्ट्स को खरीदता है उनमें से टॉप-5 की आयात 70% के करीब है।

चीन को भारत क्या बेचता है?

चीन को भारत के निर्यात(बेचने) में औद्योगिक इनपुट, निर्माण सामग्री और मछली जैसी कुछ खराब होने वाली वस्तुएं शामिल हैं। मुख्य रुप से भारत चीन को कॉटन यानी कपास, कॉपर यानी तांबा, हीरा और अन्य प्राकृतिक रत्न बेचता है।

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