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3 साल से बंद इस हवाई कंपनी को लगा एक और झटका, क्या इसके विमान हवा में भर पाएंगे उड़ान?

तीन साल से माली हालत से जूझ रही इस एयर कंपनी को एक और झटका लगा है। इस बार इस कंपनी के आय में भारी गिरावट देखी गई है। अब सवाल उठने लगा है कि क्या इस कंपनी के विमान कभी वापस से आसमान में उड़ान भर पाएंगे।

India TV Business Desk Edited By: India TV Business Desk
Updated on: November 11, 2022 23:21 IST
3 साल से बंद इस हवाई कंपनी को लगा एक और झटका- India TV Hindi
Photo:INDIA TV 3 साल से बंद इस हवाई कंपनी को लगा एक और झटका

Airline: जेट एयरवेज को सितंबर में समाप्त तिमाही में 308.24 करोड़ रुपये का एकल शुद्ध घाटा हुआ है। एयरलाइन कंपनी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है। जेट एयरवेज का परिचालन तीन साल से अधिक से बंद है। विमानन कंपनी ने एक साल पहले इसी अवधि में 305.76 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया था। 

मंजूरी के बाद भी नहीं शुरु हआ परिचालन

कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत जालान फ्रिट्स गठजोड़ एयरलाइन के लिए विजेता बोलीदाता के रूप में उभरा था। पिछले साल जून में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने गठजोड़ की समाधान योजना को मंजूरी दे दी थी। हालांकि, जेट एयरवेज अबतक परिचालन शुरू नहीं कर पाई है। 

लगातार घाटे में है ये कंपनी

चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में जेट एयरवेज की कुल आय एक साल पहले की समान अवधि के 45.01 करोड़ रुपये से घटकर 13.52 करोड़ रुपये रह गई। सितंबर तिमाही में जेट एयरवेज का कुल खर्च भी बढ़कर 321.76 करोड़ रुपये हो गया।

रिफंड की मांग कर रही कंपनी

जेट एयरवेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संजीव कपूर ने शुक्रवार सुबह एक ट्विटर यूजर को जवाब दिया कि 2019 से रद्द फ्लाइट टिकट के लिए रिफंड मांगा गया है। बता दें, कपूर ब्लू टिक के लिए शुल्क देने के मसले पर बात कर रहे थे। 

इस वजह से बंद हुई थी जेट एयरवेज की उड़ान

कई जानकारों का कहना है कि जेट की मुश्किल तब से शुरू हुई जब गोयल ने 2007 में प्रतिद्वंदी कंपनी सहारा को 1450 करोड़ रुपए में खरीदा था। इस डील के साथ ही जेट फाइनेंशियल, लीगल और एचआर की कई मुश्किलों में फंस गई। गोयल ने एयर डक्कन, इंडिगो और स्पाइसजेट को टक्कर देने के लिए सहारा को खरीदा था, लेकिन यह रणनीति पूरी तरह उल्टी पड़ गई। साथ ही गोयल ने आईपीओ का पैसा नए प्लेन ऑर्डर करने में खर्च कर दिया।

इसके बाद गोयल ने दूसरी गलती कर दी। उन्होंने 10 एयरबस A330 और बोइंग 777 प्लेन का ऑर्डर दे दिया। दो तरह के प्लेन खरीदकर जेट ने अपना खर्च बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं किया। इसके साथ ही गोयल ने सीट भी कम रखी। ग्लोबल प्रैक्टिस में जहां 400 सीटें होती हैं वहां इसमें सिर्फ 308 सीटें थीं। यानी रेवेन्यू का एक चौथाई हिस्सा खुद खत्म कर लिया। लेंडर्स ने जब जेट को नीलाम करने की कोशिश की तो गोयल ने लंदन से बोली लगाई। लेकिन उनका ऑफर खारिज कर दिया गया। ऐसे कई मौकों पर एतिहाद और TPG ने धमकी दी कि अगर नरेश गोयल अपना हाथ नहीं खींचेंगे तो वो बाहर हो जाएंगे।

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