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WPI Inflation: थोक महंगाई दर में थोड़ी राहत मिली, जून में 15.18% से घटकर जुलाई में 13.93% पर आई

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Aug 16, 2022 01:29 pm IST,  Updated : Aug 16, 2022 01:29 pm IST

WPI Inflation: थोक महंगाई दर में थोड़ी राहत मिली, जून में 15.18% से घटकर जुलाई में 13.93% पर आई WPI Inflation some relief in wholesale price index, rate down from 15.18% in June to 13.93% in July

WPI inflation - India TV Hindi
WPI inflation Image Source : FILE

WPI Inflation: खाने-पीने का सामान सस्ता होने और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में नरमी से थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति जुलाई में घटकर 13.93 प्रतिशत पर आ गई। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति इससे पिछले महीने 15.18 फीसदी और मई में 15.88 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई पर थी। यह पिछले साल जुलाई में 11.57 फीसदी थी। डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति में जुलाई के दूसरे महीने से गिरावट का रुख देखने को मिला। इससे पहले पिछले साल अप्रैल से लगातार 16वें महीने में यह दोहरे अंकों में थी। जुलाई में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति घटकर 10.77 प्रतिशत रह गई, जो जून में 14.39 प्रतिशत थी। सब्जियों के दाम जुलाई में घटकर 18.25 फीसदी पर आ गए, जो पिछले महीने 56.75 फीसदी पर थे। ईंधन और बिजली में महंगाई दर जुलाई में 43.75 फीसदी रही, जो इससे पिछले महीने 40.38 फीसदी थी।

खाने का तेल सस्ता हुआ

विनिर्मित उत्पादों और तिलहन की मुद्रास्फीति क्रमशः 8.16 प्रतिशत और नकारात्मक 4.06 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक मुख्य रूप से मौद्रिक नीति के जरिए मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखता है। खुदरा मुद्रास्फीति लगातार सातवें महीने रिजर्व बैंक द्वारा तय लक्ष्य से ऊपर रही। जुलाई में यह 6.71 प्रतिशत पर थी। महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने इस साल प्रमुख ब्याज दर को तीन बार बढ़ाकर 5.40 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने 2022-23 में खुदरा मुद्रास्फीति के 6.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है। जुलाई के दौरान सब्जियों की कीमतों में गिरावट रही। हालांकि ईंधन की महंगाई में बढ़त का रुख बना हुआ है।

रिजर्व बैंक के लक्ष्य से ज्यादा महंगाई

सब्जी, खाद्य तेल जैसे खाद्य उत्पादों के सस्ता होने से खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में नरम होकर 6.71 प्रतिशत पर आ गयी। हालांकि यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर की उच्च सीमा 6.0 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बरकरार रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। आंकड़ों के अनुसार जुलाई में खुदरा महंगाई में नरमी आने का मुख्य कारण सब्जी और खाद्य तेल के दामों में कमी है। ईंधन और बिजली के संदर्भ में कीमतें ऊंची बनी हुई है।

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