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Tokenisation: क्या है टोकनाइजेशन? डेबिट क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग के लिए 1 जनवरी से होगा जरूरी, जानिए सब कुछ

आप हर बार अपने कार्ड की डिटेल नहीं दर्ज करना चाहते हैं तो आप बैंक से अपने कार्ड नंबर के एवज में टोकन ले सकते हैं।

India TV Paisa Desk Written by: India TV Paisa Desk
Published on: December 22, 2021 13:35 IST
Tokenisation: क्या है...- India TV Hindi News
Photo:FILE

Tokenisation: क्या है टोकनाइजेशन? डेबिट क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग के लिए 1 जनवरी से होगा जरूरी, जानिए सब कुछ

Highlights

  • अब कोई भी ईकॉमर्स वेबसाइट आपके कार्ड की डिटेल स्टोर नहीं कर पाएगी
  • आप बैंक से अपने कार्ड नंबर के एवज में टोकन ले सकते हैं
  • टोकनाइजेशन का कॉन्सेप्ट सिर्फ घरेलू ट्रांजेक्शन के लिए है

What is Card Tokenisation: देश में जारी साइबर फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए रिजर्व बैंक 1 जनवरी 2022 से नया नियम लागू करने जा रहा है। इसके तहत डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर दो बदलाव भी वजूद में आ जाएंगे। पहला बदलाव यह है कि आपको अब हर पेमेंट के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड के 16 अंक दर्ज करने होंगे। अब कोई भी ईकॉमर्स वेबसाइट आपके कार्ड की डिटेल स्टोर नहीं कर पाएगी। आपको हर बार कार्ड नंबर और एक्सपायरी डेट तथा सीवीवी नंबर दर्ज करना होगा। 

यहां आपको एक विकल्प मिलेगा जो कि आरबीआई द्वारा किया जा रहा दूसरा बदलाव है। यदि आप हर बार अपने कार्ड की डिटेल नहीं दर्ज करना चाहते हैं तो आप बैंक से अपने कार्ड नंबर के एवज में टोकन ले सकते हैं। यही व्यवस्था टोकनाइजेशन की है। ये नए नियम 1 जनवरी 2022 से लागू होंगे। बता दें कि टोकनाइजेशन का कॉन्सेप्ट सिर्फ घरेलू ट्रांजेक्शन के लिए है, ना कि इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन के लिए।

क्या है टोकनाइजेशन What is Card Tokenisation

जो बदलाव सबसे ज्यादा लोगों को उलझा रहा है वह है टोकनाइजेशन का। अभी तक डिजिटल लेन-देन के दौरान बार बार डेबिट या क्रेडिट कार्ड की ​डिटेल भरने के झंझट से बचने के लिए लोग अपने कार्ड को ईकॉमर्स या पेमेंट वेबसाइट पर रिकॉर्ड कर देते हैं ऐसे में पेमेंट के लिए उन्हें सिर्फ सीवीवी नंबर और ओटीपी भरना होता है। टोकनाइजेशन (Tokenisation) इसी का विकल्प है। ये आपके कार्ड की जानकारी को एक यूनिक वैकल्पिक कोड में बदलेगा जिसके इस्तेमाल से ट्रांजेक्शन संभव होगी। इस प्रक्रिया में आपको अपने कार्ड के सीवीवी (तीन डिजिट वाला नंबर) और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा आपको अतिरिक्ट ऑथेन्टिकेशन के लिए भी अपनी सहमति देनी होगी।

टोकन कैसे मिलेगा?

खरीददारी के दौरान जब आप टोकन का विकल्प चुनेंगे तब मर्चेंट कार्ड का टोकनाइजेशन शुरू करेगा। आपकी सहमति लेकर टोकनाइजेशन के लिए कार्ड नेटवर्क को अनुरोध भेजा जाएगा। यहाँ ये कार्ड नेटवर्क आपके कार्ड नंबर (16 डिजिट का नंबर जो कार्ड पर अंकित होता है) की बजाय आपको एक टोकन देगा। अब मर्चेंट वो टोकन आपको देगा और आप इस तरह अपनी लेन-देन बिन कार्ड की जानकारी साझा किए कर पाएँगे। हर बार आपको लेन-देन के लिए आपके सीवीवी और ओटीपी की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन 16 डिजिट वाले नंबर की नहीं।

कौन जारी करेगा टोकन?

वीजा, मास्टरकार्ड और रूपे जैसे कार्ड नेटवर्क्स के जरिए टोकन जारी किया जाएगा और वह कार्ड जारी करने वाले बैंक को इसकी सूचना दे देंगे। कुछ बैंक कार्ड नेटवर्क्स से यह भी कह सकते हैं कि उन्हें टोकन जारी करने से पहले बैंक से इजाजत लेनी होगी।

सभी वेबसाइट के लिए एक ही टोकन होगा?

नहीं, मर्चेंट और कार्ड के कॉम्बिनेशन के आधार पर एक यूनीक टोकन जारी होगा। यानी अगर आपके पास एक कार्ड है, जिससे आप 3 मर्चेंट के पास ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं तो आपको तीन टोकन जारी किए जाएंगे। यानी जितने अधिक मर्चेंट के पास आप ट्रांजेक्शन करेंगे, आपके लिए उतने अधिक टोकन जारी होंगे।

क्या टोकनाइजेशन सुरक्षित है?

अभी तक आप जब किसी मर्चेंट से लेन-देन करते थे तो कई बार मजबूर किया जाता था कि वो आपकी कार्ड डिटेल सेव कर लें। इस तरह डेटा चोरी होने का खतरा काफी बढ़ जाता था। हालाँकि नए सिस्टम में कार्ड का विवरण इन्क्रिप्टिड ढंग से सेव किया जाएगा यानी जो डेटा लीक का खतरा पहले होता था वो इस प्रक्रिया में कम हो जाएगा।

एचडीएफसी बैंक ने किया आगाह

एचडीएफसी बैंक जैसे बैंकों ने पिछले हफ्ते मैसेज भेजकर अपने उपभोक्ताओं को ये जानकारी दी है। एचडीएफसी द्वारा भेजे गए मैसेज में लिखा है, “नए नियम 1 जनवरी 2022 से लागू होंगे। आरबीआई के आदेशानुसार, कार्ड (डेबिट/क्रेडिट) की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए मर्चेंट वेबसाइट/ऐप पर संभाले गए आपके एचडीएफसी बैंक कार्ड की जानकारी को डिलीट कर दिया जाएगा। पेमेंट करने के लिए, हर बार कार्ड की पूरी जानकारी डालें या टोकनाइजेशन का विकल्प चुनें।”

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