पिता कैफी आजमी की लिखी पंक्तियों 'कोई तो सूद चुकाए, कोई तो जिम्मा ले/ उस इंकलाब का जो आज तक उधार है..' शबाना के दिल के तारों को इस कदर छूती हैं कि जो उन्हें समाज के प्रति जिम्मदारी निभाने में अपना योगदान देने के लिए हर पल प्रेरित करती हैं। इसी जज्बे से प्रेरित शबाना ने समाज के विभिन्न पहलुओं की जटिलताओं को पर्दे पर तो बखूबी दिखाया ही, साथ ही समाज के लिए कुछ करने के जज्बे से समाज सेवा से भी जुड़ीं।
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