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Hindi News हेल्थ इस फल को कहा जाता है शुगर नाशक, डायबिटीज के मरीजों के लिए करता है टॉनिक की तरह काम, जानें कैसे करें सेवन?

इस फल को कहा जाता है शुगर नाशक, डायबिटीज के मरीजों के लिए करता है टॉनिक की तरह काम, जानें कैसे करें सेवन?

Guava Fruit For Diabetes Patients: सर्दियों में बिकने वाला यह फल डायबिटीज के मरीज के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। चलिए जानते हैं शुगर को कंट्रोल करने के लिए इसका सेवन कैसे करें?

डायबिटीज - India TV Hindi Image Source : UNSPLASH डायबिटीज

डायबिटीज के मरीजों को कुछ फल खाने की मनाही होती है तो कुछ फल का सेवन उनके लिए अमृत समान होता है। इसलिए डॉक्टर हमेशा उन्हें हाई फाइबर और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल खाने की सलाह देते हैं। ऐसा ही एक फल है जो फाइबर से भरपूर है और सर्दियों में खूब बिकता है। इस फल को शुगर नाशक भी कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं अमरूद की। चलिए जानते हैं कितना होता है अमरूद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स और डायबिटीज के मरीज़ों को कैसे करना चाहिए इसका सेवन?

कितना होता है अमरूद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स?

अमरूद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है, जो आमतौर पर 12 से 24 के बीच रहता है, और पकने पर यह लगभग 19 या 12 तक हो सकता है। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स की वजह से यह  फल डायबिटीज के मरीजों के लिए अमृत फल माना गया है। यह रक्त शर्करा को धीरे-धीरे बढ़ाता है और फाइबर से भरपूर होने के कारण शुगर के अवशोषण को धीमा करता है।

कई पोषक तत्वों से है भरपूर:

अमरूद में कई बेहतरीन पोषक तत्व पाए जाते हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद है। इसमें विटामिन सी, फाइबर, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करते हैं। इसके सेवन से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बेहतर होता है।

अमरूद कब खाना चाहिए?

डायबिटीज के मरीज दिन में 1 मध्यम आकार का अमरूद खा सकते हैं, खासकर नाश्ते या दोपहर के स्नैक के रूप में, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और यह फाइबर से भरपूर होता है जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है।

अमरूद खाने से मिलते हैं ये अन्य फायदे:

सुबह खाली पेट अमरूद खाने से पेट और पाचन संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं। इससे कब्ज से राहत मिलती है। अमरूद खाने से मोटापा भी कम होता है। अमरूद में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और इससे हार्ट की बीमारियां होने का खतरा कम होता है। साथ ही ये बैड कॉलेस्ट्रॉलको भी कम करता है। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

 

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