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जानें सडन कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में कैसे करें पहचान? इन टिप्स से बच सकती है जान

सडन कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक जैसे नहीं होते। चलिए जानते हैं हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच क्या अंतर है और इस स्थिति में कैसे बचाव करें?

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK/UNSPLASH कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक

जब कोई व्यक्ति अचानक गिर जाता है या बेहोश हो जाता है, तो लोग तुरंत इसे हार्ट अटैक या सडन कार्डियक अरेस्ट समझ लेते हैं। लेकिन सच यह है कि हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट दो अलग-अलग मेडिकल इमरजेंसी हैं। दोनों दिल से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन इनके कारण, लक्षण और इलाज पूरी तरह अलग होते हैं।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर

हार्ट अटैक मुख्य रूप से एक ब्लॉकेज की समस्या है। जब दिल की मांसपेशी तक खून पहुंचाने वाली कोरोनरी आर्टरी में थक्का जम जाता है, तो खून का प्रवाह रुक जाता है। इससे दिल के उस हिस्से को नुकसान पहुंचने लगता है। वहीं सडन कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी है। इसमें दिल की धड़कन अचानक खतरनाक रूप से अनियमित हो जाती है और दिल प्रभावी ढंग से खून पंप करना बंद कर देता है। यहां समस्या ब्लॉकेज की नहीं, बल्कि दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाली विद्युत प्रणाली की होती है।

क्या हैं लक्षण?

हार्ट अटैक आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होता है। इसके लक्षण मिनटों या घंटों में बढ़ सकते हैं। व्यक्ति को पहले सीने में दर्द, घबराहट, पसीना या सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। सडन कार्डियक अरेस्ट बिना चेतावनी के होता है। व्यक्ति सामान्य रूप से बात कर रहा हो या चल रहा हो, और अचानक गिरकर बेहोश हो सकता है। यह स्थिति कुछ ही सेकंड में विकसित हो जाती है।

व्यक्ति की स्थिति

हार्ट अटैक के दौरान अधिकतर लोग होश में रहते हैं। वे दर्द महसूस करते हैं और मदद मांग सकते हैं। लेकिन सडन कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति तुरंत बेहोश हो जाता है। उसकी नब्ज नहीं मिलती और सामान्य सांस भी बंद हो सकती है। यह स्थिति जीवन के लिए तुरंत खतरा बन जाती है।

इमरजेंसी में क्या करें?

हार्ट अटैक में सबसे जरूरी है कि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि ब्लॉकेज हटाने और खून का प्रवाह बहाल करने के लिए इलाज किया जा सके। जबकि सडन कार्डियक अरेस्ट में हर सेकंड कीमती होता है। तुरंत CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) शुरू करना और यदि उपलब्ध हो तो AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफाइब्रिलेटर) का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। शुरुआती कुछ मिनटों में दिया गया CPR और डिफाइब्रिलेशन जान बचा सकता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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