आंखों का कैंसर एक गंभीर लेकिन दुर्लभ बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर मामूली लगते हैं और नजरअंदाज हो जाते हैं। समय रहते इसके संकेतों को पहचान लिया जाए तो इलाज आसान हो सकता है और नजर भी बचाई जा सकती है। डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट, डॉ. रजत कपूर, कहते हैं कि समय रहते इसकी पहचान न हो पाए तो यह न सिर्फ आंखों की रोशनी छीन सकता है, बल्कि जान के लिए भी खतरा बन सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण आम आंखों की परेशानियों जैसे ही लगते हैं, जिससे लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।
आंखों के कैंसर के लक्षण
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अचानक या धीरे-धीरे धुंधला दिखना
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आंखों के भीतर या आसपास नई गांठ या सूजन
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रंगों को पहचानने में परेशानी
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आंखों में लगातार या असहनीय दर्द
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लंबे समय तक एक ही आंख में परेशानी बने रहना
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बच्चों में फोटो खिंचवाते समय आंखों में सफेद चमक दिखना
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहद ज़रूरी है।
गलत पहचान क्यों बनती है खतरनाक?
आंखों के कैंसर का सबसे बड़ा खतरा इसकी गलत या देर से पहचान है। जब लोग इसे सामान्य सिरदर्द, आंखों की थकान या स्क्रीन के अधिक इस्तेमाल का असर मानकर टाल देते हैं, तब बीमारी को फैलने का समय मिल जाता है। देर से निदान होने पर न केवल दृष्टि खोने का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि कैंसर आंख से बाहर फैलकर शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।
कैसे करें बचाव?
आंखों के कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से इसका सफल इलाज संभव है। कई मामलों में समय पर इलाज से आंखों की रोशनी भी बचाई जा सकती है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। आंखों से जुड़ी किसी भी असामान्य, दर्दनाक या लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्या को कभी भी मामूली न समझें। समय पर जांच न सिर्फ आंखों की, बल्कि आपकी ज़िंदगी की भी रक्षा कर सकती है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)