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Rajat Sharma's Blog: महाराष्ट्र के नेताओं में आपसी भरोसे की कमी है

इस सारे प्रकरण में मेरा यह मानना है कि महाराष्ट्र की सियासत में सबसे बड़ी मुश्किल भरोसे की है। आज कोई किसी पर यकीन नहीं कर रहा है।

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अब जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने फ्लोर टेस्ट का सामना करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया है, शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के अगला मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं प्रबल हो गई है । मंगलवार की सुबह सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच  ने 27 नवंबर को फ्लोर टेस्ट (बहुमत परीक्षण) का निर्देश दिया था, लेकिन बहुमत न होने के कारण पहले अजित पवार और उनके बाद देवेन्द्र फडणवीस ने इस्तीफा दे दिय़ा। 
 
सोमवार शाम को शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन ने एनसीपी सुप्रीम शरद पवार, शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडसे की मौजूदगी में मुंबई के एक होटल में 162 विधायकों की परेड कराई थी। सभी विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग न होने और अपने नेताओं के निर्देश मानने की शपथ ली।
 
इस सारे प्रकरण में  मेरा यह मानना है कि महाराष्ट्र की सियासत में सबसे बड़ी मुश्किल भरोसे की है। आज कोई किसी पर यकीन नहीं कर रहा है। कांग्रेस को शरद पवार पर यकीन नहीं है और शिवसेना को कांग्रेस पर यकीन नहीं है वहीं महाराष्ट्र की सियासत के सबसे वरिष्ठ नेता शरद पवार को न तो कांग्रेस और न ही शिवसेना पर यकीन है।
 
बीजेपी के खेमे में भी पार्टी नेतृत्व को एनसीपी के बागी नेता अजित पवार पर भरोसा नहीं हैं । पार्टियों के विधायकों को अपनी ही पार्टी के नेताओं पर भरोसा नहीं है और न ही पार्टी के नेता पर विधायकों को भरोसा है। किसी को नहीं पता कि कौन किसके साथ जाएगा। ऐसे में उद्धव ठाकरे के लिए तीन पार्टियों की आघाड़ी (गठबंधन) की सरकार को चलाना एक कठिन काम रहेगा।  (रजत शर्मा)

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