वास्तविक अभियान
ऑपरेशन में उग्रवादियों के भागने के सारे रास्ते बंद करने के लिए कुछ स्नाइपर्स की भी तैनाती की गई थी। इस पूरे अभियान में किसी भी कमांडो को कोई खरोंच तक नहीं आई। सेना की रणनीती ये थी कि कम से कम अटैक में ज्यादा से ज्यादा नुकसान करके बेस पर वापस लौट आएं।
इस पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल करने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत निगरानी में लगे बेस को इंफाल में बनाया गया था। सेना के पास उग्रवादियों के कैंप और मैप की खुफिया जानकारी थी। सेना की टीम पूरी तैयारी कर के अपने साथ गोला-बारूद भी लेकर गई थी। साथ ही, इस ऑपरेशन में एक दूसरी टीम को स्टैंडबाई पर भी रखा गया था।
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