सोशल मीडिया पर AI वीडियो और डीपफेक कंटेंट को लेकर सरकार ने कड़ा रुख़ अपनाया है। अब सोशल मीडिया कंपनियों को वो AI कंटेंट तीन घंटे के भीतर हटाना होगा, जिसे सरकार हटाने को कहेगी। इसके अलावा अब सोशल मीडिया कंपनियों की ये ज़िम्मेदारी होगी कि वो अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए कंटेंट की लेबलिंग करें। अगर कोई AI कंटेंट पोस्ट करता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को उस पर साफ-साफ़ लिखना होगा कि ये AI-generated कंटेंट है। जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने मंगलवार को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड के नियमों का अपडेटेड version जारी किया है।
इसमें सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों से कहा है कि वो सिंथेटिक, डीपफेक और AI -generated कंटेंट को स्पष्ट रूप से flag करें, उनकी स्पष्ट लेबलिंग करें, अगर सरकार या अदालत इस तरह के किसी कंटेंट को हटाने का आदेश देती हैं तो उस तीन घंटे के अंदर हटाना होगा। पहले ये समयसीमा 36 घंटे की थी। सरकार के ये नए IT नियम 20 फ़रवरी से लागू हो जाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई गैरकानूनी या नकली और जाली दस्तावेज, बच्चों के शोषण वाला कंटेंट, विस्फोटक सामग्री वाले कंटेंट या फिर किसी की नक़ल करने वाला कंटेंट उनके प्लेटफॉर्म पर सर्कुलेट न हो, वरना कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
DeepFake कंटेंट के खिलाफ सरकार का फैसला अच्छा है। ये जरूरी था। मैं खुद DeepFake कंटेंट का शिकार हूं। मेरे video पर AI generated voice लगाकर कभी दवाइयां बेची जाती है, तो कभी पैसा invest करके कई गुना मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता है। पिछले कुछ महीनों में मैंने ऐसे सैकड़ों वीडियो कोर्ट से आदेश लेकर हटवाए हैं, लेकिन जब तक वीडियो हटाए जाते थे तब तक लाखों लोग उन्हें देख चुके होते थे। अब फर्जी AI कंटेंट को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। इससे बहुत से लोग धोखा खाने से बचेंगे। (रजत शर्मा)
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