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Hindi News भारत उत्तर प्रदेश उसरी चट्टी कांड: माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खिलाफ 21 साल बाद हत्या का मुकदमा दर्ज, जानें क्या है पूरा मामला

उसरी चट्टी कांड: माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खिलाफ 21 साल बाद हत्या का मुकदमा दर्ज, जानें क्या है पूरा मामला

मऊ के पूर्व विधायक और बांदा जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनके खिलाफ हत्या का एक और मामला दर्ज किया गया है। ये मामला साल 2001 में हुए उसरी चट्टी कांड को लेकर दर्ज हुआ है।

Mukhtar Ansari- India TV Hindi Image Source : FILE मुख्तार अंसारी

लखनऊ: मऊ के पूर्व विधायक और बांदा जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खिलाफ हत्या का नया केस दर्ज किया गया है।  मृतक मनोज राय के पिता ने ये केस साल 2001 के उसरी चट्टी कांड में दर्ज कराया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि अंसारी के खिलाफ गाजीपुर के पीएस मोहम्मदाबाद में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले 18 जनवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजीपुर एमपी/एमएलए कोर्ट के 15 मार्च के उस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसमें अंसारी को बांदा में उच्च श्रेणी की जेल में रखने की अनुमति दी गई थी। यह आदेश जस्टिस डीके सिंह ने राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया था।

अदालत ने आदेश देते हुए कहा था कि विशेष अदालत का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है और गैंगस्टर, खूंखार अपराधी बाहुबली अंसारी कानूनी तौर पर जेल में उच्च श्रेणी पाने का हकदार नहीं है। याचिका में गाजीपुर की विशेष अदालत एमपी/एमएलए कोर्ट के उस आदेश की वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें अंसारी को सुपीरियर जेल में रखने की अनुमति दी गई थी।

राज्य सरकार ने क्या कहा?

राज्य सरकार ने कहा कि यूपी जेल मैनुअल 2022 के मुताबिक, कोर्ट को सिर्फ सुपीरियर क्लास की सिफारिश करने का अधिकार है, लेकिन इसे स्वीकार या खारिज करने का अंतिम अधिकार सिर्फ सरकार के पास है। 

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि हाई कोर्ट को यह अधिकार है कि वह राज्य सरकार और जिला न्यायालय के जिलाधिकारी को अपनी सिफारिश भेज सकता है। जेल मैनुअल के तहत यह सुविधा देते समय विचाराधीन बंदी की शिक्षा, उसका आचरण, आपराधिक घटना की प्रकृति और आपराधिक मंशा को देखा जाएगा। 

राज्य सरकार ने कहा कि अंसारी का लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके ऊपर 58 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह गिरोह का सरगना है। अपराध गंभीर प्रकृति का है। खूंखार अपराधी को उच्च श्रेणी नहीं दी जा सकती। अधीनस्थ अदालत अधिकार क्षेत्र से बाहर चली गई है और उच्च श्रेणी देने का निर्देश दिया। अदालत को इस तरह का आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।

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