बकरीद 2019: दुनिया के कई हिस्सों में आज ईद अल अज़हा यानि बकरीद मनाया जाएगा। बकरीद मीठी ईद के करीह दो महीने और 70 दिन के बाद मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह त्योहार हर साल ज़िलहिज्ज के महीने में आता है।
बकरीद का सही अर्थ?
कई लोग बकरीद को बकरों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका बकरा से कोई मतलब नहीं है। बल्कि यह त्योहार कुर्बानी का त्योहार है। दरअसल, अरबी भाषा में बक़र का मतलब होता है बड़ा जानवर, जिसे ज़िबा यानि जिसकी बली दी जाती है। यही शब्द बिगड़ कर अब भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में 'बकरा ईद' हो गया है। और इस ईद के दौरान लोग बकरे का बली देते हैं।
ईद उल अज़हा का क्या महत्व है?
ये ईद मुसलमानों के पैग़म्बर और हज़रत मोहम्मद के पूर्वज हज़रत इब्राहिम की क़ुर्बानी को याद करने के लिए मनाई जाती है। मुसलमानों का विश्वास है कि अल्लाह ने इब्राहिम की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी मांगी थी। इब्राहिम ने अपने जवान बेटे इस्माइल को अल्लाह की राह में कुर्बान करने का फैसला कर लिया, लेकिन वो जैसे ही अपने बेटे को कुर्बान करने वाले थे अल्लाह ने उनकी जगह एक दुंबे को रख दिया। ऐसा माना जाता है कि अल्लाह सिर्फ उनकी परीक्षा ले रहे थे। और अब इस दिन को हज़रत इब्राहिम को याद करते हुए मनाई जाती है। इस दिन लोग कुर्बानी के तौर पर बकरे की बली देते हैं।
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