नामवर सिंह की ये किताबें हिंदी साहित्य में आज भी करती है राज, आइए देखें उनकी चर्चित किताबों की झलकियां
नामवर सिंह सिर्फ एक साहित्यकार या हिंदी साहित्य के आलोचक के रूप में नहीं जाने जाते थे बल्कि वह एक युग थे जिसका आज अंत हो गया। उनकी लेखनी की विशेषता ही उन्हें दूसरे साहित्यकार से अलग करती थी। वह हिन्दी के शीर्षस्थ शोधकार-समालोचक, निबन्धकार तथा मूर्द्धन्य सांस्कृतिक-ऐतिहासिक उपन्यास लेखक 'हजारी प्रसाद द्विवेदी' के प्रिय शिष्य भी थे।

छायावाद
इस पुस्तक के अंतर्गत यह बताने का प्रयास किया गया है कि कैसे जब एक लेखक कुछ लिखता हो तो वह कई तरह की चीजों से प्रभावित होता है। जैसे अनुभव, आसपास की घटित हो रही घटनाएं, परिवार, समाज आदि। और यह सबकुछ लेखक के लेखनी में साफ दिखाई देता है।
इतिहास और आलोचना
इस किताब के माध्यम से नामवर सिंह ने यह बात साफ तौर पर स्पष्ट कर दिया कि साहित्य के बारे में उतनी ही सच है जितनी जीवन का सत्य। हिंदी में आज इतिहास लिखने के लिए यदि विशेष उत्साह दिखाई पड़ रहा है तो यही समझा जाएगा कि स्वराज्य-प्राप्ति के बाद सारा भारत जिस प्रकार सभी क्षेत्रों में इतिहास-निर्माण के लिए उत्साहित है उसी प्रकार हिंदी के विद्वान एवं साहित्यकार भी अपना ऐतिहासिक दायित्व निभाने के लिए प्रयत्नशील हैं।