क्या आपको भी डोसा और सांभर काफी ज्यादा पसंद है? अगर हां, तो आज हम आपको डोसे से जुड़े एक इंटरेस्टिंग फैक्ट के बारे में बताएंगे। जब कभी भी आप शादी में या फिर कहीं भी बाहर डोसा खाने जाते हैं, तो आप नोटिस करते होंगे कि डोसा बनाने वाला शख्स डोसे के बैटर को तवे पर फैलाने से पहले तवे के ऊपर पानी छिड़कता है। आपको बता दें कि इस स्टेप के पीछे साइंस छिपी हुई है। आइए जानते हैं, कि तवे के ऊपर पानी क्यों छिड़का जाता है।
पुरानी ट्रिक के पीछे छिपा कारण- डोसे को न केवल साउथ इंडिया में बल्कि नॉर्थ इंडिया में भी काफी ज्यादा चाव के साथ खाया जाता है। पुराने जमाने से जब भी डोसे के बैटर को गर्मागर्म तवे पर फैलाने की बारी आती है, तब तवे पर पहले पानी छिड़का जाता है। इस स्टेप को लीडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट की वजह से फॉलो किया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये कॉन्सेप्ट फिजिक्स से जुड़ा हुआ है।
क्या है लीडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट- लीडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट को अगर आसान भाषा में समझने की कोशिश की जाए, तो इसमें तरल पदार्थ जैसे पानी अपने बॉइलिंग पॉइंट से बहुत गर्म सतह के संपर्क में आने पर तुरंत नहीं उबलता है। ऐसी परिस्थिति में सतह यानी सर्फेस और तरल यानी लिक्विड के बीच भाप की एक इन्सुलेटिंग परत बन जाती है। यही परत पानी को सर्फेस के सीधे संपर्क में आने से रोकती है। डोसा का बैटर डालने से पहले तवे पर पानी का छिड़काव इसी वजह से किया जाता है।
समझिए पूरी बात- अब आप सोच रहे होंगे कि डोसा बनाने और लीडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट के बीच में क्या कनेक्शन है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब तवे पर एक परत बन जाती है, तो डोसे का बैटर तवे पर चिपकता नहीं है। लीडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट न केवल बैटर को तवे पर चिपकने से रोकता है बल्कि डोसे के बैटर को स्प्रेड करने के काम को भी आसान बनाता है। इस स्टेप के कारण डोसा किनारे से पतला और कुरकुरा बनता है और बीच से नरम रहता है।
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