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जानें, क्यों सभी धर्मों के लिए खास है गोरखनाथ मंदिर

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही यह मंदिन बहुत अधिक चर्चा में है। इसके साथ ही यह मंदिर मकर संक्रांति मं लगने वाले विशाल मेले के कारण भी काफी चर्चित है। जानिए इस मंदिर के बारें में।

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धर्म डेस्क: योगी आदित्यनाथ यूपी के 21वें मुख्यमंत्री बने है। वह गोरखपुर स्थित नाथ संप्रदाय के संत, बाबा गोरखनाथ मंदिर के मंहत भी है। इसके साथ ही वह राजनीति में काफी वर्षों से सक्रिय हैं। गोरखनाथ मंदिर धार्मिक इतिहास काफी समृद्ध रहा है। बाबा गोरखनाथ के नाम पर ही इस शहर का नाम गोरखपुर रखा गया है। यह मंदिर नाथ संप्रदाय का केंद्र है।

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योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही यह मंदिन बहुत अधिक चर्चा में है। इसके साथ ही यह मंदिर मकर संक्रांति मं लगने वाले विशाल मेले के कारण भी काफी चर्चित है। जानिए इस मंदिर के बारें में।

यह है इस मंदिर का इतिहास
गोरखनाथ नाथ (गोरखनाथ मठ) नाथ परंपरा में नाथ मठ समूह का एक मंदिर है। इसका नाम 11 वीं सदी में मौजूद मध्ययुगीन संत गोरखनाथ के नाम पर है। जो एक प्रसिद्ध योगी थे। जो भारतभर में व्यापक रूप से यात्रा करते थे और नाथ सम्प्रदाय के कैनन के हिस्से के रूप में ग्रंथों के लेखक भी थे। नाथ परंपरा गुरु मत्स्येंद्रनाथ द्वारा स्थापित की गई थी।

गोरखनाथ मंदिर उसी स्थान पर स्थित है  जहां वह मत्स्येंद्रनाथ और बाद में गोरखनाथ तपस्या करते थे। यह मंदिर नाथ संप्रदाय की आस्था का केंद्र है। मंदिर का नाम गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर रखा गया जिन्होंने अपनी तपस्या का ज्ञान मत्स्येंद्रनाथ से लिया था, जो नाथ सम्प्रदाय (मठ का समूह) के संस्थापक थे। अपने शिष्य गोरक्षनाथ के साथ मिलकर, गुरु मत्स्येंद्रनाथ ने योग स्कूलों की स्थापना की जो योग अभ्यास के लिये बहुत अच्छे स्कूल माने जाते थे।

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