'हम 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP को निरुद्ध केंद्र भेजेंगे', अभिषेक बनर्जी का दावा
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा बंगालियों को उनकी भाषा बोलने के लिए ‘निरुद्ध केंद्र में ले जाना चाहती है। मैं उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं- 2026 के चुनावों के बाद, आपको ही हम लोकतांत्रिक तरीके से हराकर निरुद्ध केंद्रों में भेजेंगे।

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल के वास्तविक निवासियों द्वारा उत्पीड़न का सामना करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद 'बांग्ला-विरोधी' पार्टी को चुनावी तौर पर ‘‘निरुद्ध केंद्र’’ में भेज दिया जाएगा। बनर्जी ने भारतीय निर्वाचन आयोग की भी आलोचना की और उस पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर मतदाता सूची में हेराफेरी करने का आरोप लगाया।
दिल्ली में उग्र आंदोलन करेगी TMC
बनर्जी ने घोषणा की कि मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के आयोग के कथित प्रयासों को रोकने के लिए पार्टी दिल्ली में एक उग्र आंदोलन करेगी। यह आंदोलन तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की अनुमति के अधीन होगा। मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड में टीएमसी की शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने दावा किया, ‘‘भाजपा बंगालियों को उनकी भाषा बोलने के लिए ‘निरुद्ध केंद्र में ले जाना चाहती है। मैं उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं- 2026 के चुनावों के बाद, आपको ही हम लोकतांत्रिक तरीके से हराकर निरुद्ध केंद्रों में भेजेंगे।’’
'भाजपा के असली चरित्र का पर्दाफाश'
टीएमसी सांसद बनर्जी ने कहा कि 2024 के आम चुनावों से पहले भाजपा को 'बांग्ला विरोधी' बताना महज एक नारा गढ़ना नहीं है, बल्कि "भाजपा के असली चरित्र का पर्दाफाश" है। टीएमसी महासचिव बनर्जी ने कहा, ‘‘भाजपा अपने अहंकार में बंगाल और उसके लोगों को लगातार अपमानित कर रही है। हमारे कार्यकर्ताओं ने 32 साल पहले वैध पहचान पत्र के साथ वोट देने के अपने अधिकार की मांग करते हुए इन सड़कों पर अपनी जान दे दी थी। अब 2025 में, हम वह दोहराने के लिए तैयार हैं। मतदाता सूची में हेराफेरी करने और उनके वोट का अधिकार छीनने की निर्वाचन आयोग की साजिश को रोकने के लिए, हम दिल्ली में भी आंदोलन कर सकते हैं।’’
हिमंत विश्व शर्मा को लेकर क्या बोले?
बनर्जी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने कथित तौर पर अपने राज्य में बांग्ला भाषी नागरिकों को निशाना बनाया है और उन्हें बांग्लादेशी बताया है। उन्होंने कहा, ‘‘असम के मुख्यमंत्री को एक निर्वाचित संवैधानिक कुर्सी पर बैठ बंगालियों के खिलाफ बोलते हुए एक पखवाड़ा बीत चुका है। मैं जानना चाहता हूं कि भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने उनके खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कदम उठाए हैं। मैं अपने सांसदों से अपील करता हूं कि यदि आवश्यक हो, तो वे वर्तमान संसद सत्र में बांग्ला में बोलें और उन्हें हमें चुप कराने की चुनौती दें।’’ उन्होंने कहा कि बंगालियों को अपनी मातृभाषा पर बहुत गर्व है और उन्हें बांग्ला भाषा में बोलने की आवृत्ति को कई गुना बढ़ाना चाहिए। (भाषा इनपुट्स के साथ)
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