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ब्याज-पर-ब्याज की छूट से 75 प्रतिशत कर्जदार होंगे लाभान्वित: रिपोर्ट

क्रिसिल के अनुसार अगर 2 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने वाले पात्र कर्जदारों को ब्याज-पर-ब्याज समेत पूरी तरह से ब्याज पर छूट दी जाती तो सरकारी खजाने पर बोझ 1.5 लाख करोड़ रुपये पड़ता। इससे सरकार के साथ-साथ वित्तीय क्षेत्र के लिये वित्तीय मोर्चे पर समस्या होती।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: October 26, 2020 21:02 IST
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Photo:GOOGLE

ब्याज-पर-ब्याज की छूट से 75 प्रतिशत कर्जदारों को फायदा

नई दिल्ली। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिये गये 40 प्रतिशत से अधिक कर्ज तथा 75 प्रतिशत कर्जदार  ब्याज-पर-ब्याज से राहत देने के निर्णय से लाभान्वित होंगे। वहीं इससे सरकारी खजाने पर करीब 7,500 करोड़ रुपये का बोझ आएगा। क्रिसिल ने अपनी एक रिपोर्ट में यह अनुमान दिया है। सरकार ने पिछले शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के समक्ष कहा कि वह 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर संचयी ब्याज यानि कंपाउंड इंट्रेस्ट से छूट देगी। इसके तहत बैंकों को संचयी ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर की राशि उपलब्ध करायी जाएगी। उसने कहा कि यह सुविधा सभी कर्जदारों को मिलेगी। भले ही उसने किस्त भुगतान को लेकर दी गयी मोहलत का लाभ उठाया हो या नहीं। लेकिन इसके लिये शर्त है कि कर्ज की किस्त का भुगतान फरवरी के अंत तक होता रहा हो यानी संबंधित कर्ज गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) नहीं हो।

क्रिसिल ने सोमवार को एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘इस प्रकार के कर्ज संस्थागत व्यवस्था (बैंक, वित्तीय संस्थान) द्वारा दिये गये कर्ज का 40 प्रतिशत है। इससे 75 प्रतिशत कर्जदारों को लाभ होगा। जबकि सरकार के खजाने पर करीब 7,500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।’’ इसमें कहा गया है कि अगर यह राहत केवल उन्हीं को दी जाती, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण रिजर्व बैंक द्वारा कर्ज लौटाने को लेकर दी गयी मोहलत का लाभ उठाया, तो सरकारी खजाने पर बोझ आधा ही पड़ता। सरकार ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से पांच नवंबर तक पात्र कर्जदारों के खाते में राशि डालने को को कहा है। यह राशि छूट अवधि छह महीने के दौरान संचयी ब्याज और साधारण ब्याज का अंतर के बराबर होगी। क्रिसिल के अनुसार अगर 2 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने वाले पात्र कर्जदारों को ब्याज-पर-ब्याज समेत पूरी तरह से ब्याज पर छूट दी जाती तो सरकारी खजाने पर बोझ 1.5 लाख करोड़ रुपये पड़ता। इससे सरकार के साथ-साथ वित्तीय क्षेत्र के लिये वित्तीय मोर्चे पर समस्या होती। छूट योजना के दायरे में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), शिक्षा, आवास, उपभोक्ता टिकाऊ, क्रेडिट कार्ड, वाहन, व्यक्तिगत कर्ज, पेशेवेर और उपभोग ऋण को शामिल किया गया है।

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