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पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सबसे ज्‍यादा 10.08% रही वृद्धि दर, मोदी सरकार अभी काफी दूर है इससे

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Aug 18, 2018 11:51 am IST,  Updated : Aug 18, 2018 12:07 pm IST

देश की आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा वित्‍त वर्ष 2006-07 में 10.08 प्रतिशत रहा, जो कि उदारीकरण शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वृद्धि का आंकड़ा है। यह आंकड़ा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का है।

manmohan singh- India TV Hindi
manmohan singh Image Source : MANMOHAN SINGH

नई दिल्‍ली। देश की आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा वित्‍त वर्ष 2006-07 में 10.08 प्रतिशत रहा, जो कि उदारीकरण शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वृद्धि का आंकड़ा है। यह आंकड़ा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। आजादी के बाद देखा जाए तो सर्वाधिक 10.2 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर 1988-89 में रही थी। उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा गठित ‘कमेटी ऑफ रियल सेक्टर स्टेटिक्स’ ने पिछली श्रृंखला (2004-05) के आधार पर जीडीपी आंकड़ा तैयार किया है। यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी की गई है। रिपोर्ट में पुरानी श्रृंखला (2004-05) और नई श्रंखला 2011-12 की कीमतों पर आधारित 

वृद्धि दर की तुलना की गई है। 

पुरानी श्रृंखला वित्‍त वर्ष 2004-05 के तहत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर स्थिर मूल्य पर 2006-07 में 9.57 प्रतिशत रही। उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। नई श्रृंखला (2011-12) के तहत यह वृद्धि दर संशोधित होकर 10.08 प्रतिशत रहने की बात कही गई है। वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव की अगुवाई में शुरू आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के बाद यह देश की सर्वाधिक वृद्धि दर है। 

रिपोर्ट के बाद कांग्रेस पार्टी ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘जीडीपी श्रृंखला पर आधारित आंकड़ा अंतत: आ गया है। यह साबित करता है कि संप्रग शासन के दौरान (औसतन 8.1 प्रतिशत) की वृद्धि दर मोदी सरकार के कार्यकाल की औसत वृद्धि दर (7.3 प्रतिशत) से अधिक रही।’’ 

पार्टी ने कहा, ‘‘संप्रग सरकार के शासन में ही वृद्धि दर दहाई अंक में रही, जो आधुनिक भारत के इतिहास में एकमात्र उदाहरण है।’’ रिपोर्ट के अनुसार बाद के वर्षों के लिए भी जीडीपी आंकड़ा संशोधित कर ऊपर गया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने इन आंकड़ों के संग्रह, मिलान और प्रसार के लिए प्रणाली तथा प्रक्रियाओं को मजबूत करने हेतु उपयुक्त उपायों का सुझाव देने के लिए समिति का गठन किया था। 

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