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Covid-19 का Delta plus वेरिएंट वैक्‍सीन क्षमता को कर रहा है प्रभावित, सरकार ने दिया ये जवाब

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Jun 29, 2021 01:18 pm IST,  Updated : Jun 29, 2021 01:18 pm IST

कोविड-19 महामारी की नई लहर कई बातों पर निर्भर करेगी, जिसमें कोविड अनुरूप व्यवहार, टेस्टिंग और कंटेनमेंट रणनीति एवं टीकाकरण की दर शामिल है।

No scientific data to show COVID Delta plus variant adversely impacts vaccine efficacy- India TV Hindi
No scientific data to show COVID Delta plus variant adversely impacts vaccine efficacy Image Source : PTI

नई दिल्‍ली। कोरोनावायरस (coronavirus) का व्‍यवहार अप्रत्‍याशित है और इसी वजह से तीसरी लहर के बारे में कोई निश्चित तिथि बताना उचित नहीं होगा। यह बात नीति आयोग के सदस्‍य और कोविड टास्‍क फोर्स के प्रमुख वीके पॉल ने सोमवार को कही। उन्‍होंने कहा कि अनुशासन और महामारी के खिलाफ प्रभावी कदम ही देश को किसी भी संकट से बचाने में मदद करेंगे। कोरोनावायरस के डेल्‍टा-प्‍लस वेरिएंट को लेकर बढ़ रही चिंता के बीच पॉल ने कहा कि अबतक हमें कोई ऐसा वैज्ञानिक डाटा उपलब्‍ध नहीं है, जो यह प्रमाणित करे कि नया वेरिएंट बहुत अधिक ट्रांसमिसिबल है या वैक्‍सीन की कार्य क्षमता को कम करता है।  

उन्‍होंने कहा कि किसी भी कोविड-19 महामारी की नई लहर कई बातों पर निर्भर करेगी, जिसमें कोविड अनुरूप व्‍यवहार, टेस्टिंग और कंटेनमेंट रणनीति एवं टीकाकरण की दर शामिल है। पॉल ने कहा कि इसके अलावा, वायरस का अप्रत्याशित व्यवहार महामारी की गतिशीलता को भी बदल सकता है। ऐसे मामले में, उनका जटिल फैक्‍टर संक्रमण के फैलने और उसके प्रकोप को निर्धारित करेगा।

उन्होंने कहा कि महामारी की और लहर आएगी या नहीं, यह हमारे अपने वश में नहीं है। मेरे हिसाब से, तीसरी लहर कब आएगी इसकी कोई तारीख नहीं बताई जा सकती है। उल्लेखनीय है कि देश में कोविड महामारी की दूसरी लहर में एक समय संक्रमितों की संख्या रोजाना चार लाख से ऊपर पहुंच गई थी, जो पिछले कुछ दिनों में घटकर 40,000 के करीब आ गई है। इसके साथ देश के कई राज्यों में पाबंदियों में ढील भी दी जा रही है।

पॉल ने कहा कि यदि हम दृढ़ संकल्प और अनुशासन के साथ काम करते हैं तथा महामारी से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाते हैं तो हम संक्रमण की किसी नई लहर से बच सकते है। वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट पर पॉल ने कहा कि इसके बारे में वैज्ञानिक जानकारी काफी शुरुआती चरण में है। उन्होंने कहा कि डेल्टा स्वरूप में जो अतिरिक्त बदलाव है, क्या उससे संक्रमण तेजी से फैलेगा या उसके संक्रमण से बीमारी ज्यादा गंभीर होगी अथवा टीके के प्रभाव पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, इन सबके बारे में अब तक कोई बात प्रमाणित नहीं हुई है। हमें इस बारे में अभी और सूचना का इंतजार करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस का नया वेरिएंट डेल्टा प्लस का पता 11 जून को चला और इसे चिंताजनक श्रेणी में रखा गया है। कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस के विरुद्ध कोवैक्सीन और कोविशील्ड की प्रतिरोधक क्षमता के बारे में पॉल ने कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिक आकलन के अनुसार दोनों टीके डेल्टा प्लस समेत कोरोना वायरस के विभिन्न वेरिएंट्स के विरुद्ध प्रभावी हैं।

कोविशील्‍ड वैक्‍सीन की दो खुराक के बीच अंतर को कम करने पर क्‍या सरकार विचार कर रही है इस सवाल पर नीति आयोग के सदस्‍य ने कहा कि कोविशील्‍ड के लिए इंटर-डोज इंटरवल को बढ़ाकर 3 माह करने का निर्णय नेशनल टेक्‍नीकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्‍यूनाइजेशन (एनटीएजी) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिसके सदस्‍यों में हमारे शीर्ष वैज्ञानिक शामिल हैं। पिछले महीने सरकार ने कोविशील्‍ड की दो खुराकों के बीच के अंतर को 6-8 सप्‍ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्‍ताह कर दिया था।

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