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करतारपुर कॉरीडोर के जरिये अपनी छवि को सुधारना और बीमार अर्थव्‍यवस्‍था में जान फूंकना चाहता है पाकिस्‍तान

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Nov 08, 2019 06:16 pm IST,  Updated : Nov 08, 2019 06:16 pm IST

पिछले साल सत्ता में आने के बाद अपने शुरुआती कामों में उन्होंने पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने का काम किया।

Through Kartarpur, Pakistan aims to rebuild economy and image- India TV Hindi
Through Kartarpur, Pakistan aims to rebuild economy and image Image Source : KARTARPUR, PAKISTAN

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान, करतारपुर कॉरीडोर के जरिये अपनी बीमार अर्थव्‍यवस्‍था में जान फूंकने और विश्‍व पटल पर अपनी छवि सुधारने का काम कर रहा है। करतारपुर कॉडीडोर के जरिये भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को अनुमति देकर वह एक उदार राष्‍ट्र के रूप में अपने आप को पेश करने के साथ ही तीर्थयात्रियों से सलाना शुल्‍क की वसूली के जरिये अपनी अर्थव्‍यवस्‍था को सुधारने की योजना बना रहा है।  

सत्‍ता में आने से पहले, प्रधानमंत्री इमरान खान अक्‍सर धार्मिक स्‍थलों सहित पर्यटन की विशाल क्षमता का दोहन न करने को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला करते रहे हैं। पिछले साल सत्‍ता में आने के बाद अपने शुरुआती कामों में उन्‍होंने पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने का काम किया।

अप्रैल में यहां इमरान सरकार द्वारा आयोजित एक पर्यटन शिखर सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए खान ने कहा था कि अल्‍लाह ने पाकिस्‍तान को खूबसूरत स्‍थलों से नवाजा है। हमें देश की सुदंरता के बारे में पर्यटकों के बीच जागरूकता फैलाने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि हमें धार्मिक पर्यटन, विशेषकर सिख, बुद्ध और हिन्‍दू अनुयायियों के लिए, को भी बढ़ावा देने की आवश्‍यकता है।  

विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता मोहम्‍मद फैजल ने कहा कि शनिवार को करतारपुर कॉरीडोर का उद्घाटन होगा और इस दिन 10,000 सिख तीर्थयात्री उद्घाटन समारोह में भाग लेंगे। इसके बाद प्रति दिन भारत से 5,000 सि‍ख और इतनी ही संख्‍या में पाकिस्‍तान से आने की उम्‍मीद है। सिख समुदाय के लिए इस कॉरीडोर के खुलने से पाकिस्‍तान को धार्मिक पर्यटन के रूप में एक बड़ा अवसर मिलेगा।

पिछले दो दशकों के दौरान पाकिस्‍तान हिंसा और आतंकवाद से परेशान है। देश की अर्थव्‍यवस्‍था बुरी तरह से ध्‍वस्‍त हो चुकी है और इसे अब कारोबार के लिहाज से सबसे खराब देश माना जाने लगा है। सरकार का अनुमान है कि 2018 के अंत तक उसे 126 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।

कॉरीडोर को खोलने से पाकिस्‍तान को फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स की ग्रे लिस्‍ट से बाहर निकलने में भी मदद मिल सकती है। एफएटीएफ फरवरी में आतंक-वित्‍तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग में पाकिस्‍तान के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा। जहां तक अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार की बात है तो धार्मिक पर्यटन प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, पाकिस्‍तान ने भारत से आने वाले प्रत्‍येक तीर्थयात्री पर 20 डॉलर का सेवा शुल्‍क लगाने का निर्णय लिया है।

अधिकारियों को उम्‍मीद है कि वह करतारपुर कॉरीडोर से सालाना एक अच्‍छी रकम एकत्रित कर पाएंगे, जो भुगतान संतुलन को समर्थन देने और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मददगार होगा। पाकिस्‍तान को करतारपुर स्थित दरबार साहिब में आने वाले तीर्थयात्रियों से सालाना 258 करोड़ रुपए (571 करोड़ पाकिस्‍तानी रुपए) का राजस्‍व हासिल होने की संभावना है।

पिछले हफ्ते 185 सिखों के एक समूह ने बाबा गुरु नानक की 550वीं जन्‍म दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पाकिस्‍तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के जरिये लंदन से लाहौर की यात्रा की इससे नकदी संकट से जूझ रही सार्वजनिक एयरलाइन को अप्रत्‍यक्ष रूप से फायदा हुआ।  

फैजल ने कहा कि पर्यटन एक उद्योग है जिस पर पाकिस्‍तान ने पहले कभी ध्‍यान नहीं दिया, हालांकि खान सरकार देश में इस उद्योग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्‍यान दे रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में 17.5 लाख पर्यटकों ने पाकिस्‍तान की यात्रा की।

वर्ल्‍ड ट्रेवल एंड टूरिज्‍म काउंसिल के मुताबिक 2019 में पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था में ट्रेवल एंड टूरिज्‍म का प्रत्‍यक्ष योगदान 2009.89 करोड़ डॉलर का रहा। फैजल ने बताया कि धार्मिक पर्यटन के अंतर्गत कई परियोजनाएं अभी पाइपलाइन में हैं और इन पर तेजी से काम किया जा रहा है।   

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