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ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने विजय माल्या को दिवालिया घोषित किया, सम्पत्तियों की जब्ती का रास्ता साफ

ब्रिटेन हाई कोर्ट ने विजय माल्या के खिलाफ दिवालिया आदेश जारी कर दिया है। अब इसके बाद भारतीय बैंकों को दुनिया भर में उनकी संपत्ति को कब्जा करने की अनुमति मिल सकेगी।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: July 26, 2021 22:55 IST
ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने विजय माल्या को दिवालिया घोषित किया, सम्पत्तियों की जब्ती का रास्ता साफ- India TV Paisa
Photo:PTI

ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने विजय माल्या को दिवालिया घोषित किया, सम्पत्तियों की जब्ती का रास्ता साफ

लंदन: ब्रिटेन की एक अदालत ने सोमवार को विजय माल्या को दिवालिया घोषित किए जाने का आदेश जारी किया। इससे भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई में भारतीय बैंकों के समूह के लिये बंद पड़ी एयरलाइन किंगफिशर के ऊपर बकाये कर्ज की वसूली को लेकर वैश्विक स्तर पर उनकी सम्पत्तियों की जब्ती की कार्रवाई कराने का रास्ता साफ हो गया है।

लंदन के हाई कोर्ट के उच्चतम न्यायालय प्रभाग के मुख्य ऋण शोधन और दिवाला तथा कंपनी मामलों के न्यायालय (आईसीसी) के न्यायाधीश माइकल ब्रिग्स ने मामले की ऑनलाइन सुनवाई के दौरान अपने फैसले में कहा, ‘‘मैं डॉ माल्या को दिवालिया घोषित करता हूं।’’ विधि कंपनी टीएलटी एलएलपी और अधिवक्ता मार्सिया शेकरडेमियन ने भारतीय बैंकों का प्रतिनिधित्व किया और दिवालियापन के आदेश को लेकर अपने तर्क रखे।

कारोबारी 65 साल के माल्या ब्रिटेन में फिलहाल जमानत पर हैं। ऐसा समझा जाता है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया से जुड़े एक अलग मामले में देश में शरण देने के मुद्दे पर गोपनीय कानूनी कार्रवाई का समाधान होने तक वह जमानतम पर रह सकते हैं। उनके वकील फिलिप मार्शल ने मामले में स्थगन के साथ-साथ आदेश को स्थगित करने का आग्रह किया। हालांकि, न्यायाधीश ने आग्रह ठुकरा दिया। 

उन्होंने कहा कि इस बात के ‘अपर्याप्त सबूत’ है कि याचिकाकर्ताओं को ऋण उचित समय के भीतर पूरी तरह से वापस कर दिया जाएगा। उन्होंने दिवालियापन के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगने वाला एक आवेदन भी रखा, जिसे न्यायाधीश ब्रिग्स ने अस्वीकार कर दिया। कर्ज वसूली से जुड़े मामले में तेरह बैंकों के समूह याचिकाकर्ता हैं। याचिकाकर्ता एक अरब ब्रिटिश पौंड के कर्ज के संदर्भ में दिवालिया आदेश के क्रियान्वयन को लेकर कानूनी कर रहे हैं। माल्या के वकीलों की टीम ने तर्क दिया कि कर्ज विवादित बना हुआ है और भारत में चल रही कार्यवाही ब्रिटेन में दिवालियापन के आदेश को निषेध करता है।

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