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Pre-open IPO सत्र पर सेबी ने निगरानी कर दी टाइट, आ गया ये नया नियम, समझें पूरी बात

 Published : Jun 21, 2024 07:57 am IST,  Updated : Jun 21, 2024 07:57 am IST

सुबह 9 बजे से 60 मिनट तक चलने वाला नया सत्र ऑर्डर एंट्री, ऑर्डर संशोधन, ऑर्डर रद्दीकरण, ऑर्डर मिलान और व्यापार पुष्टि के लिए विशेष अंतराल के साथ स्ट्रक्टचर्ड किया जाएगा।

आम निवेशकों के नुकसान के लिए संभवतः कीमत में हेरफेर किया जाता है। - India TV Hindi
आम निवेशकों के नुकसान के लिए संभवतः कीमत में हेरफेर किया जाता है। Image Source : FILE

मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए प्री-ओपन कॉल नीलामी सत्रों के दुरुपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त निगरानी का प्रावधान कर दिया है। सेबी ने अपने नए सर्कुलर में कहा है कि सुबह 9 बजे से 60 मिनट तक चलने वाला नया सत्र ऑर्डर एंट्री, ऑर्डर संशोधन, ऑर्डर रद्दीकरण, ऑर्डर मिलान और व्यापार पुष्टि के लिए विशेष अंतराल के साथ स्ट्रक्टचर्ड किया जाएगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इसको लेकर आए सेबी के नए नियम 90 दिनों के बाद लागू हो जाएंगे।

नए नियम में क्या होगा

खबर के मुताबिक, प्री-ऑक्शन सत्र सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक 60 मिनट की अवधि के लिए होगा। जिसमें से 45 मिनट ऑर्डर एंट्री, ऑर्डर संशोधन और ऑर्डर कैंसिलेशन के लिए, 10 मिनट ऑर्डर मिलान और व्यापार पुष्टि के लिए और बाकी 5 मिनट प्री-ओपन सत्र से सामान्य ट्रेडिंग सत्र में संक्रमण को सुविधाजनक बनाने के लिए बफर अवधि होगी। सर्कुलर में यह भी बताया गया है कि बदले हुए नियम ऑर्डर एंट्री के आखिरी 10 मिनट के दौरान सिस्टम-संचालित रैंडम क्लोजर की भी अनुमति देंगे, जो ऑर्डर एंट्री विंडो के 35वें और 45वें मिनट के बीच कभी भी हो सकता है।

स्टॉक एक्सचेंज अलर्ट जेनरेट कर सकेंगे

सेबी ने कहा कि यह पहल उन ऑर्डर को कैंसिल करने के जवाब में किया गया है, जो कॉल नीलामी सत्र के बंद होने से ठीक पहले हाई प्राइस और बड़ी मात्रा में दिए जाते हैं, जिससे झूठी डिमांड और आपूर्ति पैदा होती है और आम निवेशकों के नुकसान के लिए संभवतः कीमत में हेरफेर किया जाता है।

खबर के मुताबिक, निगरानी तंत्र के अलावा, स्टॉक एक्सचेंज पहले से रखे गए ऑर्डर से कीमतों में काफी बदलाव, रद्द की गई मात्रा/मूल्य प्री-ओपन सत्र के दौरान बाजार में कुल रद्द की गई मात्रा/मूल्य के 5 प्रतिशत से ज्यादा या क्लाइंट द्वारा रखी गई मात्रा/मूल्य के 50 प्रतिशत से अधिक होने जैसे मापदंडों के आधार पर अलर्ट जेनरेट करेंगे।

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