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लगातार तीसरे महीने बढ़ी महंगाई की दर, जानिए इसका नए साल शुरू होने से पहले किस बात के हैं संकेत

आंकड़ों को देखें तो देश में महंगाई की दर बढ़ी है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है। यह आरबीआई के मध्यम अवधि के अनुमानों के भीतर है।

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Updated on: December 14, 2021 11:55 IST
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Photo:FILE

लगातार तीसरे महीने बढ़ी महंगाई की दर, जानिए नए साल शुरू होने से पहले किस बात के हैं संकेत

Highlights

  • देश में खाने पीने की वस्तुओं में लगातार तेजी आ रही है
  • देश में महंगाई दर लगातार तीसरे महीने बढ़ गई है
  • देश में महंगाई की दर बढ़ी है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है

महंगाई की आग फिलहाल बुझती नहीं आ रही है। देश में खाने पीने की वस्तुओं में लगातार तेजी आ रही है। यही कारण है देश में महंगाई दर लगातार तीसरे महीने बढ़ गई है। सोमवार को सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य उत्पाद महंगा होने से खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर महीने में मामूली बढ़कर 4.91 प्रतिशत पर पहुंच गयी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस साल अक्टूबर में 4.48 प्रतिशत और नवंबर, 2020 में 6.93 प्रतिशत थी। 

नए साल के लिए क्या हैं संकेत

आंकड़ों को देखें तो देश में महंगाई की दर बढ़ी है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है। यह आरबीआई के मध्यम अवधि के अनुमानों के भीतर है। ऐसे में माना जा रहा है। अगले साल पहली बार जब फरवरी में रिजर्व बैंक ब्याज दरों की घोषणा करेगा तो उम्मीद कम ही है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव हो। आरबीआई अगली समीक्षा में भी ब्याज दरें स्थिर रख सकती है। 

महंगाई दर 6 प्रतिशत हुई तो दरें बढ़नी तय

सामान्यतः खुदरा महंगाई दर के 6 प्रतिशत (सह्यता स्तर) से अधिक होते ही भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट में वृद्धि के बारे में सोचना शुरू कर देता हैं। परंतु वर्तमान समय की आवश्यकताओं को देखते हुए मुद्रास्फीति के लक्ष्य में नरमी बनाए रखना जरूरी हो गया है क्योंकि देश की विकास दर में तेजी लाना अभी अधिक जरूरी है। मुद्रास्फीति के लक्ष्य के सम्बंध में यह नरमी आगे आने वाले समय में भी बनाए रखी जानी चाहिये। वर्तमान परिस्थितियों में विकास पर फोकस करना जरूरी है। वैसे भी खुदरा महंगाई दर वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान 5.3 प्रतिशत ही रहने वाली है, जो सह्यता स्तर से नीचे है। 

आरबीआई ने क्या कहा

भारतीय रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई दर पर गौर करता है। उसका मानना है कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा चालू वित्त वर्ष की बची हुई अवधि में ऊंचा रहेगा क्योंकि तुलनात्मक आधार का प्रभाव अब प्रतिकूल हो गया है। रिजर्व बैंक के अनुसार, मुख्य मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में उच्चस्तर पर रहेगी। उसके बाद इसमें नरमी आएगी।

CPI आधारित महंगाई क्या है?

आपको बता दें कि जब हम महंगाई दर की बात करते हैं, तो यहां हम कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स (CPI) पर आधारित महंगाई की बात कर रहे हैं। सीपीआई सामान और सेवाओं की खुदरा कीमतों में बदलाव को ट्रैक करती है, जिन्हें परिवार अपने रोजाना के इस्तेमाल के लिए खरीदते हैं। सीपीआई में एक विशेष कमोडिटी के लिए रिटेल कीमतों को देखा जाता है। इन्हें ग्रामीण, शहरी और पूरे भारत के स्तर पर देखा जाता है। एक समयावधि के अंदर प्राइस इंडैक्स में बदलाव को सीपीआई आधारित महंगाई या खुदरा महंगाई कहा जाता है।

सीपीआई की गणना किस प्रकार की जाती है?

सीपीआई वस्तुओं एवं सेवाओं के एक व्यापक वर्ग का भारित-औसत मूल्य है। मदों का संग्रह जिसे अक्सर सीपीआई के वस्तुओं की ‘बास्केट' के नाम से संदर्भित किया जाता है, उन पारंपरिक उत्पादों और सेवाओं का नाम है जिसकी उपभोक्ता खरीद करता है। पिछले कुछ वर्षों से जब इन उत्पादों की कीमतें मुद्रास्फीति के कारण बढ़ती हैं तो वह क्रमिक वृद्धि बढ़ते सीपीआई में प्रतिबिंबित होती है। सीपीआई पिछले कुछ समय के दौरान वस्तुओं और सेवाओं के बास्केट के लिए उपभोक्ता द्वारा भुगतान किए गए मूल्यों में औसत परिवर्तन की माप करता है, जिसे महंगाई दर या मुद्रास्फीति कहा जाता है। मुख्य रूप से यह किसी अर्थव्यवस्था में संचयी कीमत स्तर की मात्रा निर्धारित करने का प्रयास है और देश की करेंसी यूनिट की क्रय शक्ति की माप है। वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों का भारित औसत जो किसी व्यक्ति के उपभोग तरीकों का लगभग अनुमान लगाता है, का उपयोग सीपीआई की गणना के लिए किया जाता है।

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