राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के मुताबिक, पुरानी सीपीआई सीरीज (2012 के आधार वर्ष) के तहत जनवरी 2025 में खुदरा महंगाई दर 4.26 प्रतिशत थी, जबकि दिसंबर में यह 1.33 प्रतिशत रही।
खुदरा महंगाई में उछाल के बावजूद लगातार चौथे महीने खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निचली सहनशील सीमा (2%) से नीचे बनी हुई है। मौजूदा स्तर पर महंगाई दर अभी भी नियंत्रण में मानी जा रही है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और प्रकाश मुद्रास्फीति नवंबर में 2.32% रही, जो अक्टूबर के 1.98% से अधिक है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली खाने-पीने की चीजों की कीमतें सितंबर के -2.28% की तुलना में घटकर -5.02% रह गईं।
विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में यह बड़ी गिरावट RBI को भविष्य में नीतिगत दरों पर नरम रुख अपनाने के लिए अधिक गुंजाइश प्रदान कर सकती है।
भारत की खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में आठ साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। बावजूद, खाद्य पदार्थों और मुख्य वस्तुओं की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की वजह से, अगस्त में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी देखी गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध है, जिससे वित्तीय स्थिति को सहारा मिलेगा। अच्छा मॉनसून और रेपो रेट में कटौती घरेलू वृद्धि को सहारा देंगे।
जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि दाम अभी भी बढ़ रहे हैं, यानी घर के बजट पर दबाव बना हुआ है।
सरकार की तरफ से ताजा आंकड़ों में कहा गया है कि खुदरा महंगाई जनवरी के मुकाबले फरवरी में घटी। फरवरी में आई यह गिरावट चालू वित्तीय वर्ष में सिर्फ तीसरी बार है जब महंगाई की दर 4 प्रतिशत से नीचे आई है।
साल के पहले महीने में महंगाई में आम लोगों को राहत मिली है। ग्रामीण मुद्रास्फीति दिसंबर में 5.76 प्रतिशत की तुलना में घटकर 4.64 प्रतिशत रह गई।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि कि फूड बास्केट में मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 9. 24 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 5. 66 प्रतिशत थी। एक साल पहले महीने में 6. 62 प्रतिशत थी।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जून में 5.08 प्रतिशत थी। जबकि बीते साल जुलाई में यह 7.44 प्रतिशत थी।
सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि खुदरा मुद्रास्फीति दोनों तरफ 2 प्रतिशत के मार्जिन के साथ 4 प्रतिशत पर बनी रहे। पिछले महीने, केंद्रीय बैंक ने सीपीआई मुद्रास्फीति 5 पर रहने का अनुमान लगाया था।
खुदरा के बाद थोक महंगाई में भी दिसंबर महीने में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। दिसंबर, 2023 में थोक महंगाई दर 0.73 फीसदी दर्ज हुई है। सब्जियों और दालों की कीमतों में उछाल के चलते थोक महंगाई में यह इजाफा हुआ है। दिंसबर में खुदरा महंगाई 4 महीने के उच्च स्तर पर रही थी।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को स्थिर रखा था। साथ ही नवंबर और दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने के संकेत दिए थे।
खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर नवंबर महीने में बढ़कर 8.7 प्रतिशत रही जो अक्टूबर में 6.61 प्रतिशत और पिछले साल नवंबर में 4.67 प्रतिशत थी।
CPI Inflation October 2023: महंगाई से आम लोगों को राहत के संकेत मिले हैं। अक्टूबर में महंगाई दर चार महीने के निचले स्तर 4.87 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
महंगाई में जरूर कमी आई है लेकिन अब भी यह आरबीआई के दायरे के बाहर है। आरबीआई का मुद्रास्फीति लक्ष्य 4+/- 2 प्रतिशत है।
जून में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़ने के बावजूद यह भारतीय रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के नीचे है।
Inflation RBI: भारत में अच्छे दिन के संकेत नजर आने लगे हैं। RBI के एक फैसले ने देश में महंगाई को कम करने का काम किया है। इस बार के रिपोर्ट में पिछले 34 महीने का रिकॉर्ड टूट गया है।
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