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घट गई खुदरा महंगाई, अगस्त के 2.07% से घटकर सितंबर में 1.54% पर आई, जानें किस वजह से मिली राहत

 Published : Oct 13, 2025 04:29 pm IST,  Updated : Oct 13, 2025 05:06 pm IST

विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में यह बड़ी गिरावट RBI को भविष्य में नीतिगत दरों पर नरम रुख अपनाने के लिए अधिक गुंजाइश प्रदान कर सकती है।

खुदरा महंगाई दर में कमी से सस्ते कर्ज का रास्ता साफ हो सकता है।- India TV Hindi
खुदरा महंगाई दर में कमी से सस्ते कर्ज का रास्ता साफ हो सकता है। Image Source : PTI

आम जनता और सरकार के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में खुदरा मुद्रास्फीति की दर में सितंबर महीने में भारी कमी दर्ज की गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर अगस्त के 2.07% से गिरकर सितंबर 2025 में 1.54% के स्तर पर आ गई है। 1.54% की यह दर पिछले कई वर्षों के न्यूनतम स्तरों में से एक है, और यह लगातार दूसरे महीने 2% से नीचे बनी हुई है।

क्यों घटी महंगाई

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने बताया कि यह बड़ी गिरावट मुख्य रूप से 'अनुकूल आधार प्रभाव' और खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई कमी के कारण हुई है। खाद्य महंगाई (-) 2.28%: सितंबर 2025 में खाद्य महंगाई दर ऋणात्मक (-) 2.28% रही, जो यह दर्शाती है कि खाने-पीने की वस्तुएं पिछले वर्ष की तुलना में सस्ती हुई हैं। (अगस्त में यह (-) 0.64% थी)।

गिरती कीमतों का व्यापक असर

NSO के अनुसार, सब्जियों, दालों और उत्पादों, तेल और वसा, फल, अनाज और उत्पाद, अंडा, और यहां तक कि ईंधन और रोशनी जैसे कई प्रमुख घटकों की कीमतों में कमी देखी गई है। तुलनात्मक रूप से, सितंबर 2024 में CPI आधारित महंगाई दर 5.49% थी, जो यह बताता है कि पिछले एक वर्ष में कीमतों में वृद्धि की गति कितनी धीमी हुई है।

RBI के लिए बड़ी राहत, घटाया गया अनुमान

महंगाई पर नियंत्रण से भारतीय रिजर्व बैंक या RBI को बड़ी राहत मिली है। हाल ही में, अक्टूबर में अपनी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान, RBI ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने महंगाई के अनुमान को घटाकर 2.6% कर दिया था, जो पहले अगस्त में 3.1% था।

सस्ते कर्ज का रास्ता होगा साफ!

दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी प्रगति, खरीफ फसल की अधिक बुवाई, जलाशयों में पर्याप्त जलस्तर, और खाद्यान्न का अच्छा भंडार। ये सभी कारक आगे भी खाद्य कीमतों को नियंत्रित रखने में सहायक होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में यह बड़ी गिरावट RBI को भविष्य में नीतिगत दरों पर नरम रुख अपनाने के लिए अधिक गुंजाइश प्रदान कर सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा मिलेगा।

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