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पैसों की दिक्कत में बैंक से लें ओवरड्राफ्ट की सुविधा, जानिए क्यों है फायदे का सौदा

 Written By: Sarabjeet Kaur
 Published : Jun 26, 2020 06:38 pm IST,  Updated : Jun 26, 2020 06:39 pm IST

क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन से बेहतर है ओवरड्रॉफ्ट सुविधा

Benefits of Overdraft facility- India TV Hindi
Benefits of Overdraft facility Image Source : GOOGLE

नई दिल्ली। पिछले तीन-चार महीनों से पूरे देश में कोरोना महामारी के चलते लोगों के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। लगभग हर सेक्टर में कोरोना के वजह से आर्थिक स्थिति बिगड़ती हुई नजर आ रही है। कई लोगों की नौकरियां गई है तो कुछ की सैलरी में कटौती की गई है। हालांकि, लॉकडॉउन के खुलने के बाद कई शहरों में फिर से काम शुरू है पर अभी मार्केट में डिमांड की कमी है जिसकी वजह है आर्थिक समस्या। ऐसे में अगर आपके पास भी नौकरी नहीं है या सैलरी कटने से आपके खर्चों पर असर पड़ रहा है तो आप बड़ी आसानी से बैंक से ओवरड्राफ्ट की सुविधा ले सकते हैं। जानिए कैसे करेगा बैंक आपके कैश की दिक्कत को ओवरड्राफ्ट के जरिए पूरा?

क्या है ओवरड्राफ्ट सुविधा?

हर सरकारी और प्राइवेट बैंक ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी देती है। ज्यादातर बैंक करंट, सैलरी और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ओवरड्राफ्ट की सुविधा देती है ताकि ग्राहकों द्वारा जरुरत पड़ने पर कैश का इस्तेमाल किया जा सके। एक तरह से माना जाए तो ये लोन ही होता है जो आपके खाते वाले बैंक से मिल जाता है। कई बैंक शेयर, बॉन्ड्स और इंश्योरेंस पॉलेसी के बदले भी ओवरड्राफ्ट की सुविधा अपने खाताधारक को देते हैं। ओवरड्राफ्ट की सुविधा से आप जरुरत पड़ने पर बैंक से पैसा ले सकते हैं और बाद में वापस कर सकते हैं।

कैसे ले सकते हैं ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का लाभ?

हर बैंक या एनबीएफसी अपने तय किये गये नियमों के हिसाब से ग्राहकों को ये सुविधा उपलब्ध कराती है। कुछ ग्राहकों को पहले से ही ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलती है और कुछ को बाद में बैंक से मंजूरी लेनी पड़ती है। ग्राहक इस सुविधा के लिए ऑनलाइन या खुद बैंक जाकर भी अप्लाई कर सकते हैं। कुछ बैंक अपने नियमों के मुताबिक शुरुआत में प्रोसेसिंग फीस भी ग्राहकों से लेते हैं।

ग्राहकों को दो तरह की ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी सुविधा दी जाती है। पहला सिक्योर्ड और दूसरा अनसिक्योर्ड फैसिलिटी। जैसे की नाम से ही पता चलता है कि सिक्योर्ड सुविधा यानी की जिसमें सिक्योरिटी के तौर पर पैसे लेने से पहले शेयर, बॉन्ड्स,एफडी, घर, इंश्योरेंस पॉलिसी, सैलरी के आधार पर या गिरवी रखकर बैंक से ओवरड्राफ्ट सुविधा ले सकते हैं। एक तरह से इस सुविधा को बैंक से एफडी या शेयर के बदले लोन लेना भी माना जा सकता है।

वहीं अगर अनसिक्योर्ड फैसिलिटी की बात करें तो ये तब लिया जाता है जब आपके पास कुछ भी गिरवी रखने के लिए नहीं होता और पैसे की जरुरत पड़ती है। ऐसी स्थिति में बिना सिक्योरिटी के बैंक से पैसा लिया जा सकता है जिसे क्रेडिट कार्ड से रकम निकासी भी कह सकते हैं।

कितनी रकम ले सकते हैं?

हर बैंक अपने तय नियमों के हिसाब से पैसे देती है जो कि पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि आपने बैंक के पास क्या गिरवी (कोलैटरल) रखा है। ज्यादातर बैंक सैलरी और एफडी के बदले ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने पर ज्यादा पैसे देती है और लिमिट भी ज्यादा रखते हैं। अगर आपकी पेमेंट हिस्ट्री अच्छी है तो बैंक आपकी सैलरी पर 200 प्रतिशत तक ओवरड्राफ्ट सुविधा देते हैं। वरना आम तौर पर बैंक सैलरी का 50 फीसदी ही ओवरड्राफ्ट देते हैं।

कौन ले सकता है ओवरड्राफ्ट की सुविधा?

जिस भी किसी का बैंक में पहले से सैलरी, करंट या एफडी अकाउंट होता है उन्हें ये सुविधा आसानी से बैंकों द्वारा मिल जाती है। बैंक अपने ग्राहकों के अकाउंट हिस्ट्री, वैल्यू के आधार पर पैसे देती है। साथ ही ग्राहक का क्रेडिट, पेमेंट हिस्ट्री, सिबिल स्कोर हर चीज ध्यान में रखा जाता है।

ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के फायदे?

बैंकों के मुताबिक किसी भी क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन के मुताबिक ओवरड्राफ्ट के जरिए पैसा लेना सस्ता होता है। ओवरड्राफ्ट में आपको बाकी लोन के मुकाबले कम ब्याज लगता है।साथ ही जितने समय के लिए पैसे लेते हैं बस उतने समय के लिए ही लिए गए पैसों पर ब्याज देना पड़ता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के मुताबिक करंट और क्रेडिट कार्ड अकाउंट वाले खातधारक अधिकतम 50,000 रुपये प्रति हफ्ते ओवरड्राफ्ट ले सकते हैं।

सैलरी अकाउंट वाले ग्राहकों को सैलरी का आधा या तो किसी को सैलरी का 3 गुने तक का ओवरड्राफ्ट मिल जाता है। अगर आप पर्सनल लोन लेते हैं तो ज्यादा ब्याज के साथ-साथ रकम पहले चुकाने पर पैनल्टी भी देना पड़ जाता है। लेकिन ओवरड्राफ्ट में जितने समय के लिए पैसे लिए गए हैं बस उतने समय तक ही ब्याज देना पड़ता है।

देखा गया है कि ग्राहक की पेमेंट हिस्ट्री अगर अच्छी होती है तो बैंक पहले से ही अपने ग्राहक को ओवरड्राफ्ट ऑफर देते हैं जिससे उन्हें बैंक से लोन लेने में आसानी होती है।

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