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Hindi News गुजरात भारी मिस्टेक हो गया! ठीक से नहीं सिले महिला के कपड़े, अब 5000 रुपये का भरना पड़ेगा जुर्माना

भारी मिस्टेक हो गया! ठीक से नहीं सिले महिला के कपड़े, अब 5000 रुपये का भरना पड़ेगा जुर्माना

एक महिला के कपड़े सिलने में बुटीक को गड़बड़ी करना भारी पड़ गया। अब कंज्यूमर फोरम ने बुटीक पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया है। आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला...

कंज्यूमर फोरम ने लगाया 5 हजार रुपये का जुर्माना।- India TV Hindi Image Source : PEXELS/REPRESENTATIVE IMAGE कंज्यूमर फोरम ने लगाया 5 हजार रुपये का जुर्माना।

वडोदरा: किसी सामान को खरीदने के दौरान अगर शिकायत मिलती है तो उस बारे में आवाज उठाने का अधिकार हर उपभोक्ता को मिलता है। ऐसा ही एक मामला गुजरात के वडोदरा शहर से सामने आया है। दरअसल, यहां एक महिला के कपड़े सही से नहीं सिलने पर मामला उपभोक्ता मंच तक पहुंच गया। महिला की शिकायत पर अब उपभोक्ता मंच ने भारी जुर्माना भरने का आदेश दिया है। उपभोक्ता मंच का कहना है कि इस वजह से महिला का समारोह के दौरान उत्साह फीका पड़ गया और उसे मानसिक आघात पहुंचा है। इसलिए अब बुटीक पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

मानसिक आघात पहुंचाने का आरोप

दरअसल, गुजरात के वडोदरा जिले में एक बुटीक पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ये जुर्माना उपभोक्ता मंच के द्वारा लगाया गया है। उपभोक्ता मंच ने एक महिला के कपड़ों को गलत तरीके से सिलने के मामले में ये जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता मंच का कहना है कि कपड़े को गलत तरीके से सिलकर महिला को ‘‘मानसिक आघात’’ पहुंचाया गया। इसके लिए स्थानीय बुटीक पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बता दें कि शिकायतकर्ता महिला ने दावा किया कि गलत तरीके से कपड़ा सिलने के कारण उसे अपने परिवार में एक शादी समारोह के दौरान दूसरे कपड़े पहनने पड़े। 

समारोह में फीका पड़ा उत्साह

वहीं वडोदरा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (अतिरिक्त) ने 7 मार्च को पारित अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता महिला ने अपने भतीजे की शादी के दौरान ये कपड़े पहनने की योजना बनाई थी। उपभोक्ता मंच ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि ये परिधान (तीन ब्लाउज और दो पोशाक) ठीक से सिले नहीं गए थे। इससे महिला का ‘‘समारोह के लिए उत्साह फीका हो गया और उन्हें मानसिक आघात पहुंचा।’’ आदेश में कहा गया है कि ‘‘इसलिए, हम बुटीक को मानसिक उत्पीड़न के लिए शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश देते हैं।’’ 

(इनपुट- भाषा)

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