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विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स है बेहतर या फिर फिश ऑइल, बता रहे हैं एक्सपर्ट

विटामिन D की कमी से थकान, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस कमी को पूरा करने का सबसे सस्ता और अच्छा तरीक़ा है - धूप या सूर्य की किरने, इसके अलावा आमतौर पर दो प्रमुख विकल्प सामने आते हैं सप्लीमेंट्स और फिश ऑयल।

विटामिन डी- India TV Hindi
Image Source : SOCIAL विटामिन डी

विटामिन D हमारे शरीर के लिए एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है। विटामिन D की कमी से थकान, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस कमी को पूरा करने का सबसे सस्ता और अच्छा तरीक़ा है - धूप या सूर्य की किरने, इसके अलावा आमतौर पर दो प्रमुख विकल्प सामने आते हैं सप्लीमेंट्स और फिश ऑयल। द्वारका में स्थित ब्लूम क्लिनिक्स में आयुर्वेदिक डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अंजना कालिया बता रही हैं कि विटामिन D की कमी होने पर सप्लीमेंट्स लेना चाहिए या फिश ऑयल

विटामिन D सप्लीमेंट्स करता है कमी को पूरा:

सप्लीमेंट्स की बात करें तो ये विटामिन D3 के रूप में टैबलेट, कैप्सूल या लिक्विड ड्रॉप्स के रूप में उपलब्ध होते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए, क्योंकि सही मात्रा में लिया गया सप्लीमेंट शरीर में तेजी से असर करता है और विटामिन D की कमी को जल्दी दूर करता है। सप्लीमेंट्स खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होते हैं जिन्हें धूप में पर्याप्त समय बिताने का अवसर नहीं मिलता या जिनकी कमी ज्यादा होती है। इनका एक बड़ा फायदा यह भी है कि शाकाहारी लोगों के लिए भी इनकी विकल्प मौजूद हैं।

फिश ऑयल भी है फायदेमंद: 

वहीं दूसरी ओर, फिश ऑयल भी विटामिन D का एक प्राकृतिक स्रोत है। खासतौर पर कॉड लिवर ऑयल में विटामिन D की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसके साथ ही फिश ऑयल में ओमेगा-3 फैटी एसिड भी होता है, जो दिल और मस्तिष्क की सेहत के लिए फायदेमंद है। यह शरीर की सूजन को कम करने में मदद करता है। हालांकि, फिश ऑयल से मिलने वाला विटामिन D सीमित मात्रा में होता है और इस कारण यह गंभीर कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इसके अलावा, इसकी गंध और स्वाद कुछ लोगों को पसंद नहीं आती और यह शाकाहारी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है।

कौन सा विकल्प है बेहतर?

इसलिए अगर बात करें कि कौन-सा विकल्प बेहतर है, तो इसका उत्तर आपकी स्थिति पर निर्भर करता है। यदि शरीर में विटामिन D की थोड़ी-बहुत कमी है और आप कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या से नहीं जूझ रहे हैं, तो फिश ऑयल एक प्राकृतिक और सहायक विकल्प हो सकता है। लेकिन यदि कमी अधिक है या डॉक्टर ने विशेष डोज़ की सलाह दी है, तो सप्लीमेंट्स लेना अधिक असरदार और सुरक्षित उपाय होता है।

अंजना कालिया कहती हैं कि एक्सपर्ट के तौर पर मेरी यही सलाह है कि बिना जांच और सलाह के कोई भी सप्लीमेंट शुरू न करें। हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है और इसलिए सही मार्गदर्शन के साथ ही विटामिन D की पूर्ति करनी चाहिए। आपकी सेहत सबसे कीमती है, उसे समझदारी से संभालें।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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