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बैंक ऋण में 5.82 फीसदी की वृद्धि, जमा धन 10.32 फीसदी बढ़ा

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े के मुताबिक 18 जून, 2021 को समाप्त हुए पखवाड़े में बैंक ऋण 5.82 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 108.42 लाख करोड़ हो गया जबकि जमा धन 10.32 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 152.99 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: July 02, 2021 23:24 IST
बैंक ऋण में 5.82 फीसदी की वृद्धि, जमा धन 10.32 फीसदी बढ़ा- India TV Paisa
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बैंक ऋण में 5.82 फीसदी की वृद्धि, जमा धन 10.32 फीसदी बढ़ा

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े के मुताबिक 18 जून, 2021 को समाप्त हुए पखवाड़े में बैंक ऋण 5.82 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 108.42 लाख करोड़ हो गया जबकि जमा धन 10.32 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 152.99 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार को जारी रिजर्व बैंक की 18 जून 2021 को भारत में अनुसूचित बैंकों की स्थिति पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक एक साल पहले 19 जून, 2020 को समाप्त हुए पखवाड़े में बैंक अग्रिम राशि 102.46 लाख करोड़ रुपए जबकि जमा धन 138.67 लाख करोड़ रुपए था। इससे पहले चार जून, 2021 को समाप्त हुए पखवाड़े में बैंक ऋण में 5.74 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी जबकि जमा धान के लिहाज से वृद्धि 9.73 प्रतिशत थी। वित्तीय वर्ष 2020-21 में बैंक के ऋण में 5.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि जमा धन में 11.4 प्रतिशत का उछाल आया।

आरबीआई ने जमा परिपक्व होने पर बिना दावे वाली राशि को लेकर नियमों में बदलाव किया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बैंकों में सावधि जमा की मियाद पूरी होने के बाद बिना दावे वाली राशि पर ब्याज के नियमों में बदलाव किया। फिलहाल, अगर मियादी जमा की अवधि पूरी हो जाती है और राशि का भुगतान नहीं हो पाता तथा बैंक के पास रकम बिना दावे के पड़ी रहती है तो उस पर बचत जमा पर देय ब्याज के हिसाब से ब्याज दिया जाता है। 

आरबीआई ने परिपत्र में कहा, ‘‘इसकी समीक्षा पर यह निर्णय किया गया है कि अगर मियादी जमा परिपक्व होती और राशि का भुगतान नहीं हो पाता और वह बिना दावा के बैंक में पड़ी रहती है तो उस पर ब्याज दर बचत खाता के हिसाब से या सावधि जमा की परिपक्वता पर ब्याज की अनुबंधित दर, जो भी कम हो, देय होगी।’’ 

नया नियम सभी वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंक, सहकारी बैंक, स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों में जमा पर लागू होगा। मियादी जमा में वह जमा राशि है जो बैंकों में एक निश्चित अवधि के लिये तय ब्याज पर रखी जाती है। इसमें आवर्ती, संचयी, पुनर्निवेश जमा और नकद प्रमाण पत्र जैसी जमा भी शामिल हैं।

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